Saturday, April 5, 2025
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आज “विश्व वन्यजीव दिवस”, क्या आप जीवों पर दया करते हैं ?

03 मार्च को प्रत्येक वर्ष “विश्व वन्यजीव दिवस” मनाया जाता है

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर 2013 को, अपने 68 वें सत्र में, अपने प्रस्ताव UN 68/205 में, 03 मार्च 1973 में हुए ‘जंगली जीव और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (CITES) को विश्व वन्यजीव दिवस अपनाने का दिन घोषित करने का निर्णय लिया जिसे थाईलैंड द्वारा दुनिया के जंगली जीवों और वनस्पतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मनाने के लिए प्रस्तावित किया गया था।

विश्वभर में वन्यजीवों की सुरक्षा तथा वनस्पतियों की लुप्त प्रजातियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इसे मनाया जाता है। 3 मार्च 2014 को पहली बार विश्व वन्यजीव दिवस मनाया गया था। दुनियाभर में जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की अनेक प्रजातियां धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं। भारत में इस समय 900 से भी ज्यादा जीवों की प्रजातियां खतरे में हैं। विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day) प्रत्येक वर्ष एक थीम के साथ मनाया जाता है। विश्व वन्यजीव दिवस 2024 की थीम है “लोगों और ग्रह को जोड़ना: वन्य जीव संरक्षण में डिजिटल नवाचार की खोज”। वन्यजीवों से हमें भोजन तथा औषधियों के अलावा और भी कई प्रकार के लाभ मिलते हैं। इसमें से एक है वन्यजीव जलवायु संतुलित बनाए रखने में मदद करते हैं। ये मानसून को नियमित रखने तथा प्राकृतिक संसाधनों की पुनःप्राप्ति में सहयोग करते हैं।

इस दिवस को मनाने का मकसद बहुत ही साफ है कि दुनियाभर में जिस भी वजहों से वन्यजीव और वनस्पतियों लुप्त हो रही हैं उन्हें बचाने के तरीकों पर काम करना। पृथ्वी की जैव विविधता को बनाए रखने के लिए वनस्पतियां और जीव-जंतु बहुत जरूरी हैं। लेकिन पर्यावरण के असंतुलन और तरह-तरह के प्रयोग से कुछ जीव और वनस्पतियों का अस्तित्व खतरे में आ जाते हैं।

कानपुर नगर निगम द्वारा शहरी वनीकरण की दिशा में किया गया मियावाकी पद्धति से जंगल तैयार करने का नवाचार विलुप्त हो रही वनस्पतियों को बचाने के साथ-साथ वन्य जीवों एवं पशु पक्षियों के लिए भविष्य में एक प्राकृतिक आवास भी उपलब्ध कराएगी। वर्ष 2020 में शुरू किए गए इस नवाचार से शहर की चार स्थानों पर मिनी जंगल तैयार किया जा चुका है। कानपुर नगर निगम द्वारा तैयार इन मिनी जंगलों में पशु पक्षियों एवं वन्य जीव का बसेरा भी देखने को मिलता है जिसमें चिड़ियों पक्षियों के कई घोसले भी नजर आते हैं अर्थात यह जंगल पशु पक्षियों के लिये प्रजनन स्थल का रूप ले चुका है।

लेखक: डॉ विजय कुमार सिंह,
उद्यान अधीक्षक, कानपुर नगर निगम।

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