
वायरल पत्र में शिक्षा मंत्री संदीप सिंह पर लगा भ्रष्टाचार का आरोप
जीरो टॉलरेंस नीति के मामले में फंस सकते हैं कई मंत्री, योगी सरकार की गिरा रहे छवि
मंत्री जी के मोबाईल नम्बर पर आरोपों को लेकर पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया


मुख्य संवाददाता स्वराज इंडिया
लखनऊ । बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले का है जहां बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह पर 20 लाख रुपये के हिसाब से वसूली करवा कर बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाने का आरोप लगा है। इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा गया है जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल हो रहे पत्र में लिखा गया है कि बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बीएसए की पोस्टिंग के लिए 20 लाख रुपये की वसूली की है। इस काम में उनका साथ देने वालों में सेवानिवृत्त समीक्षा अधिकारी अवधेश शुक्ला और आशीष गौड़ शामिल हैं। अवधेश शुक्ला बाराबंकी के निवासी हैं और उन पर अत्यधिक संपत्ति अर्जित करने का भी आरोप है। उन्होंने हाल ही में लॉ कॉलेज और इंग्लिश मीडियम स्कूल की स्थापना की है। इससे पहले वे डिग्री कॉलेज और गैस एजेंसी चला रहे थे।
पत्र में आगे लिखा गया है कि जहां स्थानांतरण नीति के तहत 20 फीसदी स्थानांतरण होना था वहां 32 बीएसए का स्थानांतरण कर दिया गया जो 40 फीसदी से भी अधिक है। पत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति का जिक्र करते हुए कहा गया है कि मंत्री उनकी कुर्सी के नीचे ही भ्रष्टाचार फैला रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग को अनुभवहीन और अनुशासनहीन मंत्री के हाथ में देकर शिक्षा विभाग को और बदतर बना दिया गया है।
विजय किरन आनंद की सराहना-
पत्र में आईएएस अधिकारी विजय किरन आनंद की भी प्रशंसा की गई है जिन्होंने बेसिक शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्य करते हुए शिक्षकों, अधिकारियों और बच्चों के हित में काम किया है और गलत नीतियों का विरोध किया है।
भ्रष्टाचार के अन्य मामले-
पत्र में आगे लिखा गया है कि बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के कई उदाहरण हैं। जिन बीएसए को विजिलेंस ने पकड़ा और जेल भेजा उन्हें भी मोटी रकम लेकर तैनाती दी गई। इसके उदाहरण के तौर पर बीएसए बांदा, बीएसए सुल्तानपुर, बीएसए महोबा और एडी बेसिक आजमगढ़ का उल्लेख किया गया है।
पत्र में मुख्यमंत्री से अपील की गई है कि वे इन आरोपों की गहन जांच करें। पत्र लिखने वाले ने खुद को मुख्यमंत्री का शुभचिंतक बताते हुए कहा है कि ये सारी बातें सत्य हैं और मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे व्यक्तिगत रूप से इसकी जांच कराएं।