Friday, April 4, 2025
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गलत नीतियों से यूपी में बेसिक शिक्षा विभाग का ‘बेड़ा गर्क’

अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद में लगा है शिक्षक

राजेश कटियार(लेखक)

कानपुर/लखनऊ। शिक्षक जो समाज की नींव गढ़ने वाला अदृश्य शिल्पकार है आज खुद अस्थिरता और अविश्वास के दौर से गुजर रहा है। उच्च आदर्शों की अपेक्षा के बीच अधिकारहीनता की गहराई में डूबता शिक्षक अपनी कुर्सी और अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद में लगा है। समाज, सरकारी नीतियों और मीडिया के असहयोग ने उसकी आवाज को कमजोर बना दिया है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों की पक्षधरता केवल न्याय की मांग नहीं बल्कि शिक्षा के भविष्य को बचाने का संघर्ष है। यह आवाज जरूरी है क्योंकि शिक्षक के बिना समाज का निर्माण अधूरा है। जब समाज मीडिया और जिम्मेदार लोग शिक्षकों के साथ खड़े नहीं होते तो उनकी आवाज दब जाती है। ऐसे में शिक्षकों का पक्ष लेना और उनकी चुनौतियों को सामने लाना आवश्यक हो जाता है। यह पक्षधरता केवल शिक्षकों के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए भी जरूरी है। यदि शिक्षक अपने कार्य में सशक्त होंगे तो समाज का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। शिक्षक समाज के आधार स्तंभ होते हैं। शिक्षा, नैतिकता और समाज की प्रगति में उनका योगदान अनमोल है लेकिन क्या यह विडंबना नहीं है कि उसी शिक्षक को आज समाज, नीति और व्यवस्था के त्रिकोण में दोषों का पर्याय बना दिया गया है। शिक्षकों के प्रति पक्षधरता का यह सवाल उठाना सही है और इसकी तह तक जाना अत्यावश्यक। एक समय था जब शिक्षक को समाज में “गुरु” का स्थान प्राप्त था उनके लिए आदर्श स्थापित किए जाते थे और राजा से लेकर सामान्य जन तक उनका आदर करते थे लेकिन बदलते समय में वह सम्मान केवल अपेक्षाओं तक सीमित रह गया है। आज का समाज शिक्षकों से आदर्शों की अपेक्षा करता है लेकिन उनके अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। यह कहना गलत नहीं होगा कि आज शिक्षक की प्राथमिकता अपनी नौकरी और कुर्सी बचाने तक सीमित हो गई है। वह आदर्श स्थापित करना चाहता है लेकिन उस पर आरोपों और जिम्मेदारियों का बोझ इतना अधिक है कि वह अपने आदर्शों को निभाने में बाधित हो जाता है। शिक्षक भी समाज का हिस्सा हैं और उनकी भी कमियां हो सकती हैं। यह स्वीकार करना आवश्यक है कि उन्हें भी अपग्रेडेशन और प्रशिक्षण की आवश्यकता है लेकिन क्या यह सही है कि किसी नीति, योजना या व्यवस्था की असफलता का सारा दोष शिक्षकों पर डाल दिया जाए? शिक्षा व्यवस्था में कई मुद्दे हैं अपर्याप्त संसाधन, अनियमित प्रशिक्षण और ऊपर से लगातार बदलती नीतियां। इन सबका परिणाम यह होता है कि शिक्षक अपने कार्य में पूरी क्षमता से योगदान नहीं कर पाते। समाज और मीडिया अक्सर उनकी आलोचना में आगे रहते हैं लेकिन जब उनके पक्ष में खड़ा होने का समय आता है तो चुप्पी छा जाती है। आज शिक्षकों के साथ खड़े होना समय की मांग है। यह केवल उनका समर्थन नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास है। जब तक सरकार शिक्षकों को उनकी गरिमा और अधिकार नहीं देगी तब तक शिक्षा नीति में सुधार संभव नहीं। शिक्षक नीति निर्माण के पिरामिड में सबसे नीचे खड़े हैं लेकिन उनकी समस्याओं, अधिकारों और आवश्यकताओं की अनदेखी करना लंबे समय तक समाज के लिए घातक होगा। समाज, नीति और मीडिया के जिम्मेदार वर्गों को शिक्षकों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा। शिक्षक केवल आलोचना के पात्र नहीं हैं बल्कि वे सुधार, प्रोत्साहन और समर्थन के भी अधिकारी हैं। आइए हम सभी 2025 में यह संकल्प लें कि हम शिक्षकों के साथ खड़े होंगे उनके अधिकारों और उनकी समस्याओं की आवाज बनेंगे।

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दिवंगत अपना दल नेता सोनेलाल पटेल की बेटियों की लड़ाई फिर सड़क पर आई स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी अपनी पहचान और पकड़ रखने वाले अपना दल के नेता सोनेलाल पटेल की अक्टूबर 2009 में एक सड़क हादले में मौत के बाद उनकी बेटियों अनुप्रिया पटेल और पल्लवी पटेल के बीच छिड़ी सियासी विरासत की जंग एक बार फिर सड़क पर आ गई है। सोनेलाल की पुत्री और अपना दल एस की सांसद अनुप्रिया,  मोदी सरकार में मंत्री हैं जबकि पल्लवी पटेल समाजवादी पार्टी से विधायक है। यूपी सरकार में मंत्री और अपना दल (सोनेलाल पटेल) के नेता आशीष पटेल(पति अनुप्रिया पटेल) पर लगे आरोपों का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। सपा से सिराथू की विधायक व अपना दल (कमेरावादी) की नेता डा. पल्लवी पटेल ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से बड़ी मांग कर दी है। उन्होंने मंत्री आशीष पटेल के प्राविधिक शिक्षा विभाग में हुए भ्रष्टाचार के मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग करते हुए पत्र लिखा है। पल्लवी पटेल ने पत्र के माध्यम से राज्यपाल को अवगत कराया है कि उत्तर प्रदेश प्राविधिक एप्लाइड साइंस एवं ह्यूमैनिटीज सेवा संघ ने उन्हें बताया है कि प्राविधिक शिक्षा विभाग द्वारा असंवैधानिक कार्यवाही करते हुए विभागाध्यक्ष के पद प्रोन्नति के माध्यम से भर दिए गए हैं। ये पद नियमानुसार उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाने चाहिए थे।    पत्र के माध्यम से पल्लवी पटेल ने मांग की है कि प्राविधिक शिक्षा के छात्रों व शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए विभागीय भ्रष्टाचार के विरुद्ध एसआईटी गठित कर जिम्मेदार दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। उन्हें दंडित किया जाए। साथ ही नौ दिसंबर 2024 को डीपीसी के माध्यम से दिए गए शासनादेश को तत्काल निरस्त किया जाए। पल्लवी पटेल ने विधानसभा के बीते सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को सदन में उठाने की कोशिश की थी लेकिन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मुद्दा उठाने की अनुमति न दिए जाने पर उन्होंने सदन के बाहर चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के करीब देर रात तक धरना दिया था।  राज्यपाल से मुलाकात के पहले ही अपना दल कमेरावादी पार्टी की नेता पल्लवी पटेल ने कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने आशीष पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद आशीष पटेल ने जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि मेरा नाम आशीष पटेल है। मैं सरदार पटेल का बेटा हूं। मैं डरने वाला नहीं हूं। उन्होंने कहा कि सीबीआई से जांच करा लीजिए।
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