Friday, April 4, 2025
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बिहार में बाबाओं के प्रवचन या चुनावी प्रचार क्या है असल मकसद?

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पीडब्ल्यूए, उत्तर प्रदेश की संगोष्ठी में रखे गए विचार  महिलाओं ने कहा लैंगिक भेद की वजह से बराबरी के हक़ से आज भी महरूम है महिलाएं सशक्त महिलाएं, सशक्त राष्ट्र का आधार हैं, एडवोकेट अरुण कुमार ने बताये कानूनी अधिकार और कर्तव्य 

कानपुर। आज भी महिलाएं अपने हक़ की बात जोहती नज़र आतीं हैं, राष्ट्र की प्रगति महिलाओं के जीवन स्तर पर तय होती है। अगर हम किसी राष्ट्र को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें उस राष्ट्र की महिलाओं को सशक्त बनाना होगा। महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को शिक्षा, उनके मानवाधिकार और स्वतंत्रता, के साथ उन्हें हर क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के अवसर देना ताकि वे अपने जीवन को अपनी शर्तों पर जी सकें। यह बातें पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश (पीडब्ल्यूए) द्वारा आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में महिलाओं ने कहीं। 

8 मार्च शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पीडब्ल्यूए उत्तर प्रदेश के मुख्यालय से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस गोष्ठी के ऑनलाइन वेबिनार में समाज हित में क्रांतिकारी बदलाव की सूत्रधार रहीं मातृ शक्तियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए गोष्ठी का आयोजन किया गया।ऑनलाइन माँध्यम से दूरदारज से लोग एक मंच पर जुड़े और अपने विचार साझा किये। शिक्षिका आरती यादव ने कहा कि आज भी समाज की रूढ़िवादिता महिलाओं के पैरों में जंजीर सरीखीं है,जिनसे आज़ाद हुए बगैर महिलाओं के हक़ नहीं मिल पा रहे हैं इन रूढ़ियों की परम्पराओं के खिलाफ एक जनांदोलन की आवश्यकता है। समाज सेविका हेमलता कटियार ने कहा कि आज भी पुरुष वर्चस्व महिलाओं पर हावी है। पुरुषों को सामंजस्यता के साथ महिलाओं की बराबरी का हक़ स्वीकार करना चाहिए यह सामूहिक प्रगति का आधार बनता है। इंजीनियर महिमा चौधरी का कहना है कि महिलाओं की शिक्षा महत्वपूर्ण है। इसी के साथ उनके विचारों को  सम्मान मिलना चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं कि रूढ़ियों से दबी मानसिकता में महिलाएं भी महिलाओं की प्रगति में बाधक बन जाती है। मंजेश पटेल, अनामिका भदौरिया ने कहा कि महिलाओं की प्रगति में सम्पूर्ण समाज की प्रगति है इसके लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए। एडवोकेट अरुण कुमार ने महिला सशक्तिकरण के लिए विस्तार से कानूनी अधिकारों सहित कर्तव्यों पर बात रखी। महासचिव पंकज कुमार सिंह ने कहा कि महिलाओं की आधी आबादी है और यदि महिलाएं पिछड़ती है तो सभी की प्रगति प्रभावित होती है।  महिला सुरक्षा और शिक्षा यह सर्वोच्च स्तर पर क्रियान्वयन के विषय हैं। चर्चा के दौरान कोषाधिकारी विपिन पटेल, डॉ सत्येंद्र कटियार, प्रो नरेंद्र कुमार, अजय सिंह, शैलेन्द्र कुमार सचान, अशोक सिंह, आज़ाद सिंह चौहान आदि ने महिला दिवस पर महिलाओं के उत्थान पर अपने विचार प्रस्तुत किये।    

प्रोफ़ेसर साज़िया बोलीं महिलाओं ने हर क्षेत्र में खुद को साबित किया 

पीडब्ल्यूए उत्तर प्रदेश के महिला दिवस पर  आयोजित ऑनलाइन वेबिनार में इंजीनियरिंग प्रोफ़ेसर डॉ साज़िया इस्लाम निज़ामी ने कहा कि महिलाओं ने इतिहास में हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है, चाहे वह शिक्षा हो, राजनीति हो, विज्ञान हो या खेल का मैदान। वह मानव वंश की जन्मदात्री हैं, प्रेम की मूर्ति और रिश्ते संवारने वाली शक्ति है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, ममता, और त्याग का स्वरूप माना गया है। नारी के महत्व को रेखांकित किया जाता रहा है।सोनल सिंह कहतीं हैं आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, फिर भी कई चुनौतियाँ उनके सामने खड़ी हैं। समाज में आज भी घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव, शिक्षा में असमानता, दहेज प्रथा, बाल विवाह जैसी बुराइयां मौजूद हैं।

आज भी महिलाओं के लिए चुनौतियाँ हैं 

पीडब्ल्यूए उत्तर प्रदेश के महिला दिवस के मौके पर  यह  विचार भी आये कि आज के समय में महिलाओं के लिए चुनौतियां है भारत में आज भी कई क्षेत्रों में महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों की तुलना में कम है।कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ असमानता और भेदभाव किया जाता है।कई जगहों पर महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जाता है।महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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