-करीब 4 साल से अधिक कानपुर में तैनात राहुल देव कर रहे हैं भ्रष्टाचार और मनमानी

जीरो टॉलरेंस नीति वाली सरकार में उगाही का ठेका चल रहा है
-भ्रष्टाचार का अडडा बने संयुक्त निदेशक कार्यालय में शिक्षक विशाल मिश्रा और राहुल देव की जुगलबंदी
-निजी आईटीआई संचालकों का किया जा रहा है उत्पीडन
-मनमानी और उगाही की कई शिकायतों को शासनस्तर पर दबाया गया
-तत्कालीन निदेशक के निर्देश पर जेडी आगरा को दी गई जांच में भी लीपापोती
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर।
संयुक्त निदेशक राहुल देव कानपुर जेडी कार्यालय में 4 वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं। जब कि सरकार 3 साल में ही तबादला कर देती है लेकिन राहुल देव की निदेशालय में तगडी सेटिंग के कारण उनको मनमानी करने का ठेका मिला हुआ है। उनकी ही शह पर ंिहदी भाषा के शिक्षक विशाल मिश्रा जेडी कार्यालय संचालित कर रहे हैं।
निजी आईटीआई संचालकों की शिकायतों को शासन स्तर पर भी दबाया जा रहा है। मौजूदा निदेशक कुनाल सिल्कू से इस संबंध में जब बात की गई तो वह भी संयुक्त निदेशक राहुल देव की शिकायतों को नजर अंदाज करते नजर आए। उनका साफ कहना है कि मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है। जब कि सैकडो ई-मेल, आईजीआएस, स्पीडपोस्ट से शिकायतें निदेशालय भेजी गई। इनका संज्ञान नहीं लिया गया, लिया भी गया तो वह उनकी जांच सक्षमस्तर से नहीं कराई गई। जैसे, तत्कालीन निदेशक ने कानपुर जेडी की जांच समकक्ष अधिकारी जेडी आगरा को दे थी। वह आजतक पूरी भी नहीं हुई क्यों कि समकक्ष अधिकारी को दी गई जांच निष्पक्ष होना मुश्किल है। यहां पर जेडी राहुल देव और विशाल मिश्रा की जोडी भ्रष्टाचार और मनमानी करने पर उतारू है। इससे साबित हो रहा है कि राहुल देव को शासन में बैठे उच्चाधिकारी संरक्षण दे रहे हैं। इस संबंध में राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल से भी स्वराज इंडिया संवाददाता ने बात की। उन्होने कहा कि मामले को पता कराकर एक्शन लिया जाएगा लेकिन काफी वक्त बीत गया शायद इनको भी सांप सूंघ गया। अब तक कुछ नहीं हुआ है।

विशाल मिश्रा चला रहा जेडी कार्यालय
पांडुनगर स्थित आईटीआई के जेडी कार्यालय में पिछले पांच साल से उगाही का धंधा चल रहा है। आबलाइज न करने वाले निजी आईटीआई संचालकों को परेशान करने के साथ उनके छात्रों की स्कालशिप रोक दी जाती थी। इसमें टीचर विशाल मिश्रा का नाम सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि विशाल मिश्रा ने पूरे जेडी आफिस को कंट्रोल में कर रखा है। वही सारा मैनेजमेंट करता है। जब कि उसकी तैनाती किसी अन्य जगह पर है।

बीते माह कानपुर में संचालित करीब 59 निजी आईटीआई के करीब ढाई हजार बच्चों की स्काॅलरशिप आवेदन जेडी कार्यालय में मान्यता समाप्त होने की बात कहकर रोक दिए गए। आवेदन की अंतिम तिथि एक जनवरी समाप्त होने को आई तो आईटीआई संचालकों के साथ बच्चों ने डीएम कानपुर विशाख जी को मामले से अवगत कराया। डीएम ने मामले का त्वरित संज्ञान लेकर निदेशक कुनाल सिल्कू से बात की। इसमें पडताल की गई तो पता चला कि भारत सरकार ने निजी आईटीआई की मान्यता समाप्त संबंधी कार्रवाई नहीं की सिर्फ उगाही या परेशान करने के मकसद से स्कालरशिप के आवेदन जेडी कार्यालय में रोक दिए गए। इसमें कानपुर जेडी राहुल देव की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जेडी कार्यालय में काम देख रहे विशाल मिश्रा का वसूली सिंडीकेट के कारण विभाग की फजीहत हुई है। विशाल मिश्रा पिछले 4 साल से उगाही का खेल कर रहा है।
