कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बायोकेमेस्ट्री विभाग में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना प्रोजेक्ट के अंतर्गत पेस्टिसाइड एवं मानव शरीर पर होने वाले प्रभाव पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि चंद्र शेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. संजय काला भी उपस्थित रहे। इसमें भारत वर्ष के उच्च कोटि के संस्थानों के वक्ताओं ने आज कल के खान पान व खेती-किसानी से जुड़ी बातों पर चर्चा की गई। इसके अलावा बताया कि किटनाशक दवाएं मानव जीवन को किस तरह से प्रभावित कर रही हैं।

गांव के मरीजों में भी कैंसर की शिकायत देखी जा रही
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. संजय काला ने अपने क्लीनिकल अनुभव से बताया कि वर्तमान में गांव के मरीजों में भी कैंसर की बहुत अधिकता देखी जा रही है। हेवी मेटल और कीटनाशकों के प्रयोग से गाल ब्लैडर कैंसर के ऊपर एक शोध कार्य संचालित किया जा रहा है। उक्त कार्यक्रम में यूसीएमएस मेडिकल कॉलेज दिल्ली से डॉक्टर बीडी बनर्जी ने अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भोजन में कीटनाशकों के अवशेष बचे होने के कारण स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। दीर्घकाल में कैंसर डायबिटीज ऐसी बीमारियां बढ़ रही हैं।

बेहद हानिकारक होता
कार्यक्रम के उद्घाटन में डॉ. आनंद कुमार सिंह के द्वारा किसानों के अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग पर बताया गया। उन्होंने बताया कि जो कीटनाशक प्रयोग किया जाता है उसका केवल 30% हिस्सा फसलों तक प्राप्त होता है। 70% हिस्सा हवा पानी और मृदा में जाता है, जो की बेहद हानिकारक होता है।
पेस्टिसाइड की स्टडी पर चर्चा की
आईसीएमआर बेलगाम कर्नाटका से आए डॉ. राकेश कुमार जोशी ने पेस्टिसाइड के वर्गीकरण के आधार पर उनके उपयोग को दर्शाकर उन्होंने बताया कि कैसे कम से कम नुकसान मनुष्य को पहुंचे। इस पर इन्होंने विशेष चर्चा की। एम्स दिल्ली के डॉ. दुष्यंत कुमार ने नम्र के माध्यम से कीटनाशकों के विश्लेषण पर और एमआरआई मशीन के द्वारा कैसे पेस्टिसाइड की स्टडी की जा सकती है, इस पर चर्चा किया।
