Friday, April 4, 2025
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निपुण लक्ष्य से कोसों दूर यूपी के सरकारी स्कूल

आखिर क्यों निपुण नहीं बन पा रहे परिषदीय विद्यालय

मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर/लखनऊ।
परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों को भाषा व गणित में दक्ष बनाने के लिए निपुण भारत मिशन चलाया जा रहा है। प्रदेश में कुल 1.34 लाख परिषदीय स्कूल हैं और इन सभी को निपुण विद्यालय बनाया जाना है। केंद्र ने सभी स्कूलों को वर्ष 2026-27 तक निपुण बनाने का लक्ष्य दिया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश ने इसे पूरा करने के लिए कमर कस ली है। अगले वर्ष तक 80 प्रतिशत विद्यालयों को निपुण विद्यालय बनाने पर जोर दिया जा रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि परिषदीय स्कूलों में निपुण मूल्यांकन टेस्ट इस वर्ष अक्टूबर व दिसंबर और फरवरी 2025 में किया जाएगा। अभी विद्यालयों में छात्रों की 60 फीसदी तक औसत उपस्थिति रहती रही है और अब इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक किया गया है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के प्रशिक्षुओं के माध्यम से विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जायेगा जिन 80 फीसदी स्कूलों को अगले वर्ष तक निपुण बनाया जाना है उन्हें तीन वर्गों में बांटकर मूल्यांकन किया जाएगा। बाकी 20 फीसदी स्कूल 2026 तक निपुण बनाए जाएंगे। शिक्षकों को कमजोर विद्यार्थियों की अलग से कक्षाएं लेने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय संकुल स्तर पर इसकी निगरानी भी की जायेगी। बता दें निपुण भारत योजना के माध्यम से आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक के ज्ञान को छात्रों के तहत विकसित करना है। योजना के माध्यम से सत्र 2026-27 तक तीसरी कक्षा के अंत तक विद्यार्थियों को पढ़ने, लिखने एवं अंकगणित को सीखने की क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन हालात यह है कि जनपद के अधिकतर विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को निपुण भारत योजना की सटीक जानकारी तक नहीं है। शिक्षक संकुलों, एआरपी, एसआरजी के लिए जुलाई 2023 तक अपने स्कूलों को निपुण बनाना अनिवार्य किया गया था। यही नहीं प्रत्येक जिले में एक ब्लॉक को निपुण बनाने के भी निर्देश दिए गए थे लेकिन ये लोग आज तक अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए हैं। अब एक बार फिर निपुण विद्यालय बनाने के लिए समय सीमा बढ़ा दी गई है।

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