
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो, लखनऊ। डीएम मैनपुरी के अनैतिक व्यवहार और कार्रवाई पर शासन कार्रवाई करेगा? यह देखने का विषय है। मामला विगत वर्ष दिसंबर मास का है। भ्रष्टाचार की शिकायत लिए जिलाधिकारी मैनपुरी अंजनी कुमार सिंह के पास पहुंची फरियादी मां-बेटी के साथ डीएम के दुर्व्यवहार और पुलिसिया कार्रवाई के विरुद्ध पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने शासन में शिकायत की थी। जिस पर डीएम अंजनी कुमार सिंह के विरुध्द कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव अरुणेश कुमार द्विवेदी ने शिकायत की पुष्टि और समर्थन में साक्ष्य की मांग की है। शुक्रवार को पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश (पीडब्ल्यूए) ने के महासचिव पंकज कुमार सिंह ने बताया कि पीडब्ल्यूए की ओर से शासन के संयुक्त सचिव अरुणेश कुमार द्विवेदी के पत्र के जवाब में फरियादी माँ – बेटी पर की गई डीएम अंजनी कुमार सिंह की कार्रवाई का मीडिया कवरेज और अखबारों में छपी ख़बरों की कतरनों का एक बंच सेट संलग्न करते हुए साक्ष्य स्वरुप प्रेषित किया है। पीडब्ल्यूए के चेयरपर्सन वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार कटियार का कहना है कि उच्चाधिकारियों के विरुध्द जनता की शिकायत पर ज्यादातर कोई कार्रवाई नहीं होती है, ख़ास तौर पर प्रसाशन के बड़े अधिकारियों पर यह सटीक आंकलन सामने आता है। कार्रवाई में खाना पूरी कर ठंडे बास्ते में डाल दी जाती है। अब देखना है कि पीडब्ल्यूए द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्य को संयुक्त सचिव कितना गंभीरता से लेते हुए सघन जांच करके कार्रवाई को अंजाम देते हैं। अनैतिक कार्रवाई पर डीएम अंजनी कुमार सिंह की हुई थी थू-थू
7 दिसंबर 2024 को सुनवाई के दौरान मैनपुरी जिले के किशनी तहसील में समाधान दिवस के दिन महिला और उसकी बेटी को डीएम से सरकारी कर्मियों के भ्रष्टाचार और उसकी जमीन अपर अवैध कब्जे की शिकायत लिए फ़रियाद करने पहुंची थी। डीएम अंजनी कुमार सिंह के साथ में एसपी और एसडीएम भी थे। तभी वहां बहरामऊ गांव निवासी महिला राधा और बेटी दिव्या आ गईं। दोनों डीएम से इस मामले में शिकायत कर रही थीं, माँ बेटी ने कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। जिसपर डीएम अंजनी कुमार सिंह गुस्सा गए और डीएम ने जेल भेजने का फरमान सुनाया। उन्होंने कहा- दोनों शांति भंग कर रही है, दोनों को जेल में डाल दो। मीडिया को यह खबर चलते देर नहीं लगी और वायरल खबर से चौतरफा डीएम का भर्त्सना हुई थी डीएम को बैकफुट पर आना पड़ा और सफाई पेश की। मामले पर कानपुर की पब्लिक वेलफेयर एसोसिएशन ने रिज़ोलुशन पास कर शासन के कार्मिक एवं स्थापन विभाग सहित एनएचआरसी कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।