
कानपुर में गंगा नदी के किनारे जाजमऊ में स्थित है विशालकाय किला
स्थानीय भूमाफियाओं और अराजक तत्वों का अड्डा बन चुका है ययाति का किला
सनातन मठ मन्दिर रक्षा समिति ने उठाई संरक्षण की मांग
मुख्य संवाददाता स्वराज इंडिया
कानपुर।
महाभारत कालीन राजा ययाति का किला जाजमऊ कानपुर नगर उत्तर भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है, जो कि वर्तमान में भू-माफियाओं के कब्जे और उपेक्षा का शिकार हो रहा है। यह किला हजारों वर्षों की विरासत और सभ्यता के प्रमाण अपने भीतर समेटे हुए है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा पूर्व में की गई खुदाई में 2800 साल पुराने अवशेष प्राप्त हुए थे, जो इस स्थल की ऐतिहासिकता और महत्त्व को सिद्ध करते हैं।
राजा ययाति का किला 1968 में चर्चा में आया, जब पुराने गंगा पुल के निर्माण के दौरान यहाँ खुदाई शुरू हुई। इस खुदाई में मौर्य काल से लेकर मुगल काल तक के प्रमाण मिले। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित स्थल घोषित किया और कानपुर विकास प्राधिकरण को इसकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी। यह किला प्राचीन भारतीय संस्कृति, वास्तुकला और शासन व्यवस्थाओं का साक्षी है।
हालांकि एएसआई ने इसे संरक्षित किया, लेकिन भू-माफियाओं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इसका अधिकांश भाग नष्ट हो चुका है। मिट्टी की खुदाई और अवैध कब्जों ने इस ऐतिहासिक स्थल को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। बेशकीमती पुरावशेषों को निकालकर बेचा गया, और किले का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया।

तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत
सनातन मठ मन्दिर रक्षा समिति
उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय द्विवेदी और उपाध्यक्ष सुधीर द्विवेदी ने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप, भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई, और व्यापक जागरूकता अभियान की आवश्यकता है। साथ ही, एएसआई को यहाँ विस्तृत खुदाई कर शेष धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। राजा ययाति का किला न केवल हमारे इतिहास का प्रतीक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर भी है।

माफिया पप्पू स्मार्ट पर हुई थी कार्रवाई…
सूत्रों के मुताबिक करीब 5 साल पहले भूमिया पप्पू स्मार्ट उर्फ साउथ अख्तर और उसके लोगों ने किले पर कब्जा कर लिया था, गेट लगाकर कर प्लॉट बेंच डाले थे, मामले में अधिवक्ता और समाजसेवी संदीप शुक्ल अन्य लोगों ने मामले को उच्चाधिकारियों से बताया था तो कार्रवाई हुई थी लेकिन किले के संरक्षण को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं बनी।