
–कानपुर देहात में अधिकारी करते रहे जनता की अनदेखी
–शिकायतों पर नहीं होती कार्रवाई उल्टा पीडित को परेशान किया गया
–कानपुर देहात में हर-घर जल योजना से खोद डाली गांव की गलियां लेकिन कोई ध्यान नहीं
–खनन के नाम पर मची लूट, शिकायतों पर एक्शन नहीं
चुनावी समीक्षा’
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
उप्र में जीरो टॉलरेेंस नीति वाली योगी आदित्यनाथ सरकार में लोकसभा चुनाव से भाजपा को बडा झटका लगा है। इसकी समीक्षा हर स्तर पर की जा रही है कि आखिर सबकुछ बेहतर चल रहा था तो परिणाम निराश क्यों कर रहे हैं। इनमें विपक्ष द्वारा फैलाए गया आरक्षण-संविधान बदलने के भ्रम के साथ-साथ यूपी के ब्यूरोक्रेटस भी बडे जिम्मेदार हैं। जिलों में उच्च पदों पर बैठे आईएएस और आईपीएस सहित अन्य अधिकारियों का तानाशाही व्यवहार बडा कारण माना जा रहा है। अफसरों के द्वारा जनशिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा था, ज्यादा शिकायत करने वालों से ही सवाल पूछकर हत्सोहित करने का प्रयास किया जाता रहा।
कानपुर देहात जिले के चारो विधानसभा में भाजपा के विधायक 2022 में भी जीतें थे। राकेश सचान कैबिनेट मंत्री, प्रतिभा शुक्ला और अजीत पाल राज्य मंत्री थे। हकीकत यह थी इनमें राकेश सचान को छोडकर दोनों मंत्री सिर्फ नाम के थे। खनन की शिकायत प्रतिभा शुक्ला के पति पूर्व सांसद अनिल शुक्ला करते रहे लेकिन कुछ नहीं हुआ। रूरा का मंडौलीकांड अफसरों की लापरवाही से हुआ। यहां की तत्कालीन डीएम नेहा जैन सहित अन्य अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी तरह से शिवली कोतवाली के मैथा चौकी में स्थानीय कारोबारी बलवंत सिंह की पुलिस ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।

सीडीओ और बीएसए पर भ्रष्टाचार के आरोप
सीडीओ एन लक्ष्मी पर आरोप लगा कि बिना टेंडर के सीडीओ आवास पर 19 लाख रूपए का कार्य करा दिया गया। चुनावी आचार संहिता से एक दिन पूर्व आरईएस द्वारा टेंडर निकालकर पेमेंट कराने का प्रयास किया गया। मामले की शिकायत डीएम से हुई, जांच की बात की गई लेकिन कुछ नहंी हुआ। इसी तरह से बीएसए रिद्धी पांडेय पर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के कई आरोप लगे। शिकायत डीएम से लेकर शासन तक हुई लेकिन जांच के नाम पर घुमा दिया गया। कोई एक्शन नहीं लिया गया। इसी प्रकार कई विभागों में धांधली होती रही लेकिन अफसर इग्नोर करते रहे।