Friday, April 4, 2025
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कानपुर : दिव्या दुष्कर्म-मर्डर के मुख्य दोषी की सुप्रीमकोर्ट से जमानत, कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी

चर्चित दिव्या हत्याकांड में मुख्य आरोपी पीयूष 13 साल आठ माह से जेल में बंद है। अब दोषी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। 

स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो| शहर के चर्चित दिव्या से दुष्कर्म और मर्डर केस के मुख्य दोषी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। वह 13 साल आठ माह से जेल में है। उच्च न्यायालय से भी राहत न मिलने पर सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गई थी। अब मामले की सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

नाबालिग बच्ची दिव्या के साथ स्कूल में हुई थी हैवानियत

रावतपुर गांव में रहने वाली अनुष्का उर्फ दिव्या भारती ज्ञान स्थली स्कूल रावतपुर में कक्षा-6 की छात्रा थी। 27 सितंबर 2010 को वह स्कूल गई थी, लेकिन गंभीर हालत में घर लौटी। स्कूल प्रबंधक ने दिव्या को आया के साथ घर भिजवा दिया था।

हालत गंभीर होने पर परिवार के लोगों ने उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराया, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई और बच्ची ने दम तोड़ दिया था। डॉक्टरों ने मौत का कारण प्राइवेट पार्ट से अधिक खून बहने की वजह बताई थी। दिव्या की मां ने कल्याणपुर थाने में दुष्कर्म और हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस ने इसका खुलासा करते हुए पड़ोसी मुन्ना को गिरफ्तार किया था। स्कूल प्रबंधक, उनके बेटों को क्लीन चिट दे दी थी।

दिव्या के लिए शहर के लोग सड़क पर उतरे तो आरोपी गए थे जेल

इसके विरोध में शहरभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। आरोप था कि रेपकांड में स्कूल प्रबंधक के बेटे शामिल हैं। पुलिस रसूखदार होने के चलते बचा रही है। शहर के लोग सड़क पर उतरे तो पुलिस ने स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल वर्मा, उसके बेटे मुकेश, पीयूष और प्रधानाचार्य संतोष सिंह को अरेस्ट करके जेल भेजा था। कानपुर शहर का यह बेहद चर्चित मामला था।

सीबीसीआईडी ने लगाई थी चार्जशीट

शहर में हंगामा-बवाल को देखते हुए प्रदेश सरकार ने 23 अक्टूबर 2010 को विवेचना सीबीसीआइडी को सौंप दी थी। नौ नवंबर 2010 को 14 लोगों के डीएनए सैंपल लिए गए थे। मुन्ना का पहले ही लिया जा चुका था। 24 दिसंबर 2010 को सीबीसीआइडी ने स्कूल प्रबंधक चंद्रपाल, उसके बेटे मुकेश, पीयूष व लिपिक के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।

एक जनवरी 2011 को मुन्ना को बेकसूर बताते हुए रिहा किया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता गुलाम रब्बानी ने बताया कि विचारण कोर्ट ने चंद्रपाल को दोषमुक्त करार दिया था। संतोष, मुकेश को एक-एक साल और पीयूष को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। संतोष और मुकेश को जमानत मिल गई थी। पीयूष को राहत नहीं मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने पीयूष को जमानत दे दी है।

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