
स्वराज इंडिया, कानपुर। आईटीआई पांडूनगर के प्रधानाचार्य डा. नरेश कुमार को गुरूवार को निलंबित कर दिया गया। उनपर मृतक आश्रित नियुक्ति में टंकण परीक्षा धांधली में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की गई। उनको प्रशिक्षण एवं सेवायोजन निदेशालय में संबंद्ध किया गया है। फिलहाल यहां पर किसी की नए प्रधानाचार्य की तैनाती नहीं की गई है।
विश्व बैंक आईटीआई में तैनात अनुदेशिका दीपिका विश्वकर्मा ने मई 2024 में गंभीर आरोप लगाते हुए शासन में साक्ष्यों सहित शिकायत की थी। इसमंे आरोप थे कि मृतक आश्रित से होनी वाली टंकण परीक्षा गति में पास करने के लिए संबंधित अनुदेशिका पर अनैतिक रूप से दबाव बनाया गया जब उसने मना किया तो मात्र 10 दिनों में ही तीन वर्षो के लिए अनुदेशिका को टंकण परीक्षक से प्रतिबंधित कर दिया गया। शासन ने इन बिंदुओं पर जांच कराई तो अनुदेशिका के संस्थान के कार्यालध्यक्ष के प्रशासनिक अधिकारी का हनन करने एवं कार्यक्षेत्र में दखलदांजी पाया गया। अनुदेशिका पर की गई कार्रवाई गलत पाई गई। इसपर विशेष सचिव अभिषेक सिंह अनुशासनहीनता मानते हुए प्रधानाचार्य डा. नरेश कुमार को निलंबित करने का आदेश जारी किया।
छुटटी पर गए प्रधानाचार्य, कोर्ट जाने की संभावना
शासन द्वारा कार्रवाई होने की खबर लगने पर प्रिंसिपल डा. नरेश कुमार छुटटी पर चले गए थे। क्यों कि कार्रवाई होने कीचर्चा विभाग तक पहुंच गई थी। इसके चलते नरेश कुमार बचाव में उतर आए हैं। वहीं, उनका कहना है कि अनुदेशिका द्वारा लगाए गए आरोप गलत हैं। हालांकि, यहां पर अभी तक किसी भी नए प्रधानाचार्य को नहीं भेजा गया है न ही चार्ज दिया गया है। वहीं, इनपुट है कि वह हाईकोर्ट जा सकते हैं।

जेडी राहुल देव पर संरक्षण देने के लगे थे आरोप
कानपुर में कई सालों से तैनात जेडी राहुल देव की भूमिका शुरूआत से ही जांच के घेरे में है। जेडी और डा0 नरेश कुमार के बीच अच्छी खासी जुगलबंदी है। जुलाई 2024 में शासन ने डा. नरेश कुमार का तबादला लखनउ किया था यहां पर अमित कुमार पटेल को नवनियुक्ति किया गया था लेकिन जेडी ने उनको चार्ज देने में ढिलाई बरती थी। कई दिनों तक विवाद के हालात बने रहे थे। इससे योगी सरकार की किरकिरी हुई थी। वहीं, इसी बीच नरेश कुमार हाईकोर्ट से तबादला रोकने का स्टे लाकर कुर्सी पर बैठ गए।
खरीददारी और निर्माण कार्यो की जांच होना चाहिए
विभागीय सूत्रों का कहना है कि डा. नरेश कुमार के कार्यकाल में विभागीय खरीददारी और निर्माण क्षेत्र में भी धांधली की आशंका है। उनके कार्यकाल में कितने की क्या खरीददारी हुई, वह सामग्री कहां है। इसका सत्यापन कराए जाने और निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांचने की मांग की गई है। वहीं शासन के सूत्रों ने बताया है कि मामले में नजर है।