
–सीएम योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक में पुलिस एक्शन की एक ओर सराहना हुई तो दूसरी ओर सतकर्ता की सलाह दी गई
–कानपुर में अबतक दर्जन भर से अधिक पत्रकार जेल भेज दिए गए हैं, 50 से अधिक पर एफआईआर
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने पत्रकारिता के नाम पर धंधा और रैकेट संचालित करने वालों पर तगडा एक्शन लिया है। जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में पहुंची है। गुरूवार को कानपुर पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने सरसैया घाट स्थित सभागार में कानून व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होने कहा कि अपराधिक और माफिया प्रवृत्ति के पत्रकार हो या अधिवक्ता सहित अन्य सभी पर कार्रवाई जारी रखें लेकिन किसी निर्दोष पर गलत ढंग से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इसको लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश सीएम ने दिए हैं।
गत जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में सिविल लाइंस स्थित 28 हजार वर्गमीटर नजूल की सैकडों करोडों रूप्यों की जमीन पर कब्जेदारी को लेकर दो पक्षों में बवाल हुआ। इसमें कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित, हरेंद्र मसीह, जीतेश झा, संदीप शुक्ला, राहुल वर्मा सहित 13 को नामजद करते हुए 33 अज्ञात पर एफआईआर दर्ज कराई गई। अवनीश दीक्षित, जीतेश झा और संदीप शुक्ला जेल जा चुके हैं।

मामला इतना तूल पकडा कि पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार ने पत्रकारों के खिलाफ बडा अभियान छेड दिया। इसमें पत्रकारिता की आड में धंधेबाजी और वसूली में जुटे कथित पत्रकारों पर एक्शन लेने के निर्देश सभी पुलिस जोन को दिए गए। इसके बाद कानपुर में पत्रकारों के खिलाफ धडाधड मुकदमे लिखे जा रहे हैं। अबतक करीब एक दर्जन से अधिक मुकदमे तमाम पत्रकारों पर लिखे गए हैं। इनमें एक न्यूज चैनल से जुडे प्रेस क्लब के पूर्व उपाध्यक्ष नीरज अवस्थी, मुंतजिर अंसारी को एक पुराने विवाद में जेल भेज दिया गया है। इसी तरह से कमलेश फाइटर पर रंगदारी मांगने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया और गिरफतारी के आदेश हुए हैं। वहीं, उनके करीबी मो. रियाज को जेल भेज दिया गया। सूत्रों का दावा है कि अभी कई और कथित पत्रकार हैं जो कि पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हैं उनको पुलिस सलाखों के पीछे भेजेगी। हालांकि, इनमें कुछ ऐसे मामले भी हैं जो कि काफी पुराने हैं और उनको पुलिस द्वारा अब दर्ज करके कार्रवाई करने पर सवाल भी उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि सेंट्रल जोन में बीते माह एक गांजा तस्कर के इशारे पर पुलिस ने एक पत्रकार को जेल भेज दिया। उसको लेकर बाद में कुछ खुलासे हुए।
सीएम की जनसभा में पुष्टि के बाद मिली इंट्री
सीसामउ विधानसभा के अंतर्गत चुन्नीगंज जीआईसी में सीएम योगी आदित्यानाथ की जनसभा में पत्रकारों का प्रवेश कई बार पुष्टि और सूची मिलान के बाद दिया गया। इंट्री प्वाइंट पर सूचना कार्यालय द्वारा जारी सूची का मिलान पुलिस कर्मियों के द्वारा किया गया। वहीं, इसका असर भी दिखा पत्रकार दीर्घा में गिने चुने पत्रकार दिखे। इससे वहां पत्रकारों के नाम पर भीड नदारद रही। पहले तमाम वीआईपी, वीवीआईपी कार्यक्रमों पत्रकारों की कथित भीड घुस जाती थी जिससे अन्य पत्रकारों को दिक्कतों को सामना करना पडता था लेकिन अब माहौल सामान्य सा दिखा।
तमाम गाडियों से हट गए प्रेस वाले स्टीकर
पुलिस सख्ती का असर शहर की सडकों पर साफ नजर आ रहा है। तमाम लोग कार, बाइकों में प्रेस का स्टीकर लगाकर धौंस जमाते नजर आते थे, पुलिस अभियान देखकर उन लोगों ने स्वयं ही ऐसे स्टीकर हटा लिए हैं लेकिन अभी भी अपराधिक और माफिया प्रवृत्ति के लोग प्रेस और अधिवक्ता स्टीकर का दुरूप्योग कर रहे हैं। इनकी भी सख्त जांच कर कार्रवाई की जरूरत है।