परिवहन विभाग ने वाहनों की केंद्रों पर उपस्थिति तय करने व फेक एपीआइ (ऐप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) का उपयोग रोकने को एनआइसी से पाल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) को अपग्रेड कराया। एनआइसी ने पीयूसीसी वर्शन 2.0 विकसित करके टेस्टिंग भी पूरी कर लिया है। अब सभी प्रदूषण जांच केंद्रों के स्वामी व आपरेटर को मोबाइल एप पीयूसीसी सेंटर एप का उपयोग करना होगा।
लखनऊ के कुछ प्रदूषण जांच केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया प्रयोग सफल रहा है। इसके बाद से यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी।
वाहनों के प्रदूषण जांच में फर्जीवाड़े की शिकायतों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग ने कमर कस ली है। एनआईसी को प्रदूषण जांच के पोर्टल को अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए थे और अब एप के जरिये प्रदूषण जांच होगी।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदूषण की जांच के समय वाहनों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से हो और फेक एपीआई के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए यह पहल की गई है। इसके लिए पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट पोर्टल को अपग्रेड कर पीयूसीसी वर्जन 2.0 पोर्टल तैयार किया गया है। पोर्टल को लखनऊ के कुछ प्रदूषण जांच केंद्रों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया, जो सफल रहा। अब 15 अप्रैल से इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।
वाहनों के प्रदूषण की जांच केंद्रों पर अभी कैमरे से वाहन के नंबर प्लेट की फोटो खींचकर की जाती रही है। इसमें आरोप लगता रहा है कि वाहन के मौके पर लाए बिना ही केवल नंबर प्लेट की फोटो लेकर प्रदूषण फिट होने का प्रमाणपत्र जारी किया जाता रहा है।
अब सभी प्रदूषण जांच केंद्रों के स्वामी व आपरेटर को मोबाइल एप पीयूसीसी सेंटर एप का उपयोग करना होगा। इस एप को अपग्रेड पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है।