पशुपति पारस ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया है. पशुपति पारस के पास खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय था.
पशुपति पारस ने मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफ़े की घोषणा तब की है, जब एक दिन पहले ही बिहार में एनडीए ने लोकसभा चुनाव के लिए सीटों की साझेदारी की घोषणा की थी हालांकि अब लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है, ऐसे में पारस का मंत्री पद से इस्तीफ़ा देना बहुत मायने नहीं रखता है. वैसे भी उन्हें इस पद से हटना ही था.पशुपति पारस के लिए सोमवार को ही बीजेपी ने संदेश दे दिया था कि उनके लिए एनडीए में अब जगह नहीं है
बीजेपी ने चिराग पासवान को एनडीए में शामिल किया है और उन्हें पाँच सीटें मिली हैं. कहा जा रहा है कि चिराग पासवान ने बीजेपी के सामने शर्त रख दी थी कि या तो उनके चाचा एनडीए में रहेंगे या वह. बीजेपी ने चिराग को साथ रखना पसंद किया और उनके चाचा को बाहर होना पड़ा.
अक्टूबर 2020 में रामविलास पासवान का निधन हुआ था. उनका निधन मोदी कैबिनेट में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रहते हुए ही हुआ था.उम्मीद की जा रही थी कि रामविलास पासवान के बाद मंत्रालय चिराग पासवान को मिलेगा लेकिन बीजेपी ने पशुपति पारस को मंत्री बना दिया था.चिराग पासवान ने इसे लेकर नाराज़गी भी जताई थी. तब लोक जनशक्ति पार्टी के पास कुल छह सांसद थे और पाँच सांसदों के साथ पशुपति पारस ने पार्टी तोड़ दी थी.चिराग पासवान अलग-थलग पड़ गए थे लेकिन समय का पहिया घूमा और अब पशुपति पारस ही अलग-थलग पड़ गए.सोमवार को एनडीए ने सीटों की साझेदारी की घोषणा की तभी स्पष्ट हो गया था कि पशुपति पारस के पास अब अलग होने के सिवा कोई विकल्प नहीं है.मंगलवार को पारस मीडिया के सामने आए और मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफ़े की घोषणा करते हुए कहा कि उनके साथ नाइंसाफ़ी हुई है.
पारस से पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह इंडिया गठबंधन में जाएंगे? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद हम फ़ैसला लेंगे कि अब क्या करना है.
पशुपति पारस के पास राजनीति में चार दशक से ज़्यादा का अनुभव है लेकिन रामविलास पासवान जब तक ज़िंदा रहे, पारस उनके मातहत ही काम करते थे. जब रामविलास पासवान केंद्रीय मंत्री थे तो पारस बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष थे.
जब उन्होंने पार्टी तोड़ी तो ख़ुद ही एलजेपी के अध्यक्ष बन गए थे. पारस ने चुनावी राजनीति की शुरुआत 1978 में खगड़िया ज़िले के अलौली विधानसभा सीट से विधायक बनकर की थी. इस सीट से रामविलास पासवान भी विधायक बने थे.
2017 में पारस बिहार में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल का भी हिस्सा बने थे. तब नीतीश कुमार बिहार में एक बार फिर से एनडीए का हिस्सा बने थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में पशुपति पारस हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे और उन्हें जीत मिली. हाजीपुर सीट से रामविलास पासवान सांसद चुने जाते थे.
बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं. एनडीए के भीतर सीटों का बँटवारा हो गया है. बीजेपी 17, जेडीयू 16, एलजेपी (आर) पाँच, उपेंद्र कुशवाहा को एक सीट और जीतन राम मांझी को एक सीट मिली है. कहा जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी भी एक-एक सीट मिलने से ख़ुश नहीं हैं.