
–केडीए ने एनजीटी गाइड लाइन्स का हवाला देते हुए काम रूकवा दिया था, कंपाउडिंग मैप भी रिलीज नहीं किया गया
–नियम कायदे ताक पर रखकर पारस यश कोठारी ग्रुप शुरू करना चाहता है हाॅस्पिटल
–एनजीटी से संबधित मामला शासन में लंबित चल रहा
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
गंगा डूब क्षेत्र में पारस यश कोठारी हाॅस्पिटल को शुरू करने की तैयारी हो रही है। करीब छह माह पहले एनजीटी नियमों का उल्लघंन होने पर केडीए ने यहां पर निर्माण पर रोक लगाकर कंपाउडिंग मैप रिलीज नहीं किया था। तत्कालीन डीएम-वीसी ने विशाख अययर ने मामले में मार्गदर्शन के लिए शासन को पत्र लिखा था। अभी मामला लंबित है लेकिन इसी बीच पारस गु्रप हाॅस्प्टिल का संचालन शुरू करना चाहता है। निर्माणाधीन परिसर में लगातार एक्टीविटी हो रही है।
कानपुर महानगर में गंगा के आसपास का बडा इलाका डूब क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यहां पर नेशनल ग्रीन ट्रिबुनल-एनजीटी के तहत निर्माण और अन्य गतिविधियों पर रोक है। चूंकि, काफी हिस्सा सिंचाई विभाग देखता है, इसी गलत फहमी और मिलीभगत से कई निर्माण कर लिए गए। इनमें से एनएच 91 बाइपास रोड बैकुंठपुर-बिठूर रोड पर यश कोठारी वालों ने सैकडों बेड का चेरिटेबिल हाॅस्पिटल का निर्माण शुरू कराया। चैरीटेबिल हाॅस्प्टिल के संचालन के लिए पारस गु्रप के साथ समझौता कर लिया गया। करीब 6 माह पूर्व हाॅस्पिटल का उदघाटन होने वाला था, मुख्य अतिथि शहर के एक बडे नेता को बनाया गया। तत्कालीन डीएम विशाख जी अययर ने काम रूकवा दिया। सिंचाई, केडीए सहित अन्य विभागों की संयुक्त टीम बनाकर सर्वे कराया गया और कई प्रोजेक्ट रोक दिए गए। कोठारी प्रबंधन ने तत्कालीन डीएम से मिलकर कहा कि उनको इसकी जानकारी नहीं थी कि यह क्षेत्र एनजीटी के अधीन है। उनका बडा नुकसान हो रहा है काम करने दिया जाए लेकिन डीएम ने मना कर दिया। वहीं, हाॅस्टिपल प्रबंधन सहित अन्य डेवलॅपर के अनुरोध पर मामले में मार्गदर्शन के लिए पत्र शासन भेजा गया था लेकिन अबतक प्रकरण लंबित है। वहीं, इस मामले में सचिव शत्रोहन वैश्य ने बताया कि हाॅस्पिटल के संचालन पर रोक है। यदि कोई गतिविध हो रही है तो कार्रवाई की जाएगी।

कई बिल्डरों के फंसे हैं बड़े बड़े प्रोजेक्ट
कोठारी हाॅस्टिपल के पास में शहर के प्रमुख बिल्डर विश्वनाथ गुप्ता के द्वारा मल्टीस्टोरी आवासीय बिल्डिंग बनाई जा रही थी। इस प्रोजेक्ट का कार्य भी लगभग पूरा हो गया है लेकिन एनजीटी का मामला फंसने के कारण आजतक काम शुरू नहीं हो सका। जब कि बिल्डर के द्वारा कंपाडिंग के लिए 53 लाख रूप्ए भी जमा किए लेकिन मैप रिलीज नहीं हो सका है। इस तरह के कई प्रोजेक्ट हैं जो कि एनजीटी में फंस गए हैं।