सिपाही को नहीं मिली छुट्टी, बीबी और नवजात बच्ची की हुई मौत
कई दिनों से छुट्टी की मनुहार लिए दौङ रहा था सिपाही, थाना इंचार्ज एसपी के आदेश पर फार्वर्ड न कर सका
एसपी जालौन ने अपने बचाव में कैम्प कार्यालय से छुट्टी सेंशन करने का आदेश कर दिया जारी
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
जालौन (मुख्यालय उरई)। पुलिस की सबसे छोटी इकाई यानी आरक्षीगण जमीनी स्तर पर किन किन जद्दोजहद से जूझकर समाज में कानून व्यवस्था के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करके ड्यूटे पर डटे रहते हैं । यह आए दिन उनके साथ घटित घटनाओं से सामने आता रहता है लेकिन उनके हुक्मरान अपनी अंग्रेजी हुकूमत वाली मानसिकता से बाज नहीं आते। अंग्रेजी हुकूमत की यह नजीर पेश की है जालौन के पुलिस अधीक्षक डाॅ. ईरज राजा ने जिन्होंने छुट्टी न देने के मौखिक आदेश दिए और जब विपरीत परिस्थियों में आरक्षी ने छुट्टी मांगी तो एसएचओ ने सिपाही की छुट्टी सेंशन नहीं की क्योंकि एसपी का आदेश था कि छुट्टी नहीं देनी है।
मामला जालौन जिले के थाना रामपुरा में तैनात आरक्षी विकास निर्मल का बताया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जनपद मैनपुरी निवासी पुलिस कांस्टेबल विकास निर्मल ने गर्भवती पत्नी ज्योती की देखरेख व असाधारण गर्भावस्था की विपरीत परिस्थितियों और जीवनरक्षा के दृष्टिगत छुट्टी के लिए एसओ अर्जुन सिंह से प्रार्थनापत्र देकर छुट्टी मांगी थी लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एसपी डाॅ. ईरज राजा के आदेश पर एसओ ने छुट्टी देने से मना कर दिया। कांस्टेबल विकास सीओ सहित एसपी से छुट्टी की गुहार लगाता रहा पर उसकी सुनवाई कहीं नहीं हुई। इधर समुचित देखरेख व इलाज के अभाव में गर्भवती पत्नी व नवजात बच्ची की जान जोखिम में बनी रही और अन्ततः पत्नी व नवजात की मौत हो गई।
एसपी ने अपने बचाव में जारी किया छुट्टी का आदेश!
एसपी जालौन ने अपने बचाव को लेकर आनन फानन में छुट्टी का आदेश अपने कैंप कार्यालय से जारी किया। आदेश की प्रति से साफ जाहिर है कि यह बचाव में जारी किया गया आदेश है। चूंकि साफ है कि सूबे के पुलिस मुखिया द्वारा ही अवकाश पर रोक लगाई गई है लेकिन विपरीत परिस्थियों में उच्चधिकारियों के दिशानिर्देशन में अवकाश स्वीकृत करने का निर्देश है। गौरतलब है कि पुलिस अधीक्षक ने लोकसभा के चुनावी दौर में छुट्टी स्वीकृति का विस्तृत आदेश जारी कर दिया है। इससे सूगबुगाहट है कि एसपी ने अपने बचाव की नींव तैयार कर थाना इंचार्ज पर ठीकरा फोङा है।वरिष्ठ अधिवक्ता (अपराध) राजेन्द्र प्रसाद वर्मा का कहना है कि कुछ लोगों ने न्यायिक जांच की मांग उठाई है चूंकि बङे अफसर अपनी करतूतों में छोटे कर्मियों को फंसाने से नहीं चूंकते और खुद पाक-साफ बने रहते हैं, ऐसे में जांच से सभी तथ्य उजागर हो सकेंगे।
पुलिस हित के लिए पंकज सिंह ने न्यायालय तक उठाई आवाज
जिनका काम लोगों की जान बचाना है वह अपने परिवार की देखरेख के लिए छुट्टी को मोहताज रहते हैं यही कारण है कि अधिकांश आरक्षी तनावग्रस्त होकर ड्यूटी करने को मजबूर रहते हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी वे अफसरों की चौखट पर मनुहार लगाते है पर उनकी एक न सुनी जाती है। ऐसी ही घटनाओं से जूझते पुलिस कर्मियों के न्याय के लिए कानपुर के इंजीनियर पंकज कुमार सिंह स्थानीय स्तर से लेकर अदालतों तक पुलिस कर्मियों के न्याय हेतु आवाज उठाते रहे हैं और कईयों को न्याय दिलाया है।कानपुर पुलिस लाईन हादसे के पीङितों सहित बीते साल इटावा के सिपासी सोनू चौधरी के साथ घटित घटना पर भी पंकज ने एनएचआरसी आयोग का दरवाजा खटखटाया था। जालौन की घटना पर उन्होंने दुःख प्रकट किया है। उनका कहना है कि वह पुलिस के हित की आवाज जिम्मेदारों के समक्ष ऊठाते रहेंगे और न्याय की आवाज बुलन्द करेंगे।