Thursday, April 3, 2025
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लेटरल एंट्री: Modi के हनुमान ने सरकार के इस कदम का किया खुलेआम विरोध, बोले- ‘बिलकुल सहमत नहीं’

मोदी सरकार: मोदी के हनुमान कहे जाने वाले चिराग पासवान ने केंद्र सरकार से ली जा रही लेटरल इंट्री के प्रोविजन का विरोध किया है।

मोदी सरकार: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने सोमवार को लेटरल एंट्री पर मचे हंगामा को लेकर कहा कि मेरी पार्टी को इस बात का आश्वासन नहीं दिया गया है। मैं खुद इसे सरकार के साथ समझूंगा। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, ”मैंने और मेरी पूरी पार्टी ने स्पष्ट राय लिखी है कि सरकारी अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति करनी चाहिए, जिसमें शामिल हैं, जातीय तत्वों को ध्यान में रखना।” निजी क्षेत्र में ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कोई भी सरकारी कंपनी होती है, किसी भी स्तर पर किसी भी स्तर पर हो, जिसमें शामिल हों, किसी भी स्तर के उद्यमियों पर ध्यान देना चाहिए। इसमें नहीं रखा गया है, यह हमारे लिए चिंता का विषय है। मैं खुद सरकार का हिस्सा हूं और मैं इसे सरकार के साथ जोड़कर रखूंगा। हाँ… मेरी पार्टी ने सहमति नहीं दी है।”
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आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना पर क्या बोले

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना पर चिराग पासवान ने कहा कि यह गलत है, इस तरह से अगर आप सेलेक्टिव होकर आपराधिक घटनाओं को देखेंगे। एनडीए के राज्यों की घटनाओं को विपक्ष उठाएगा। लेकिन, अपने राज्य में हुई घटना पर खामोश रहेगा। यह गलत है। मैं कहता हूं कि यह सोच ही गलत है। जरूरत है कि आप लोग एकजुट होकर इस आपराधिक मानसिकता के खिलाफ लड़ें। सत्तापक्ष हो या विपक्ष, कोई भी इस घटना को बर्दाश्त नहीं कर सकता। ऐसे में जब तक हम एक साथ नहीं आएंगे। इस तरह के अपराधियों को बल मिलता रहेगा। जरूरत है ऐसे उदाहरण रखने की, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसे जघन्य व निंदनीय घटना को अंजाम नहीं दे सके।

राजनीतिक संग्राम

बता दें कि विभिन्न मंत्रालयों में सचिव और उपसचिव की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के जरिए होती है। यह देश की सर्वाधिक कठिनतम परीक्षाओं में शुमार है। प्रतिवर्ष इसमें लाखों अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं, लेकिन कुछ को ही सफलता मिल पाती है। वहीं, केंद्र सरकार ने लेटरल एंट्री की व्यवस्था विकसित करने का फैसला किया है। इसके अंतर्गत बिना यूपीएससी एग्जाम दिए अभ्यर्थी इन पदों पर दावेदारी ठोक सकते हैं। इसी को लेकर राजनीतिक संग्राम मचा हुआ है। विपक्षी दलों का कहना है कि इससे दलित, ओबीसी और आदिवासी समुदाय के लोगों के हितों पर कुठाराघात पहुंचेगा। ऐसे में इस व्यवस्था को जमीन पर उतारने से बचना चाहिए। साल 2018 में केंद्र सरकार ने इस व्यवस्था को विकसित करने का फैसला किया था। जिसके अंतर्गत कोई भी अभ्यर्थी मंत्रालयों में सचिव और उप सचिव जैसे पदों को हासिल कर सकता है।

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