
–कानपुर में क्रिसियन सोसाइटी की अरबों की जमीनों पर चल रहा अरसे से खेला
–कोतवाली और कर्नलगंज थाने में कई एफआईआर हैं दर्ज
–आगरा-लखनउ डायसेस के विवाद का भूमाफिया उठा रहे फायदा
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
महानगर में सिविल लाइंस स्थित हडर्ड स्कूल के सामने वूमेंस वेलफेयर मिशनरी सोसायटी को 100 साल पहले 28 हजार वर्ग गज जमीन अनाथ बच्चों के स्कूल संचालित करने के लिए लीज पर आंवटित की गई थी। लीज समाप्त होने के बाद उसमें कई गुट कब्जा करना चाह रहे थे। रविवार को जमीन कब्जाने के मामले में 13 नामजद सहित 33 पर मुकदमा पंजीकृत किया गया। प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार अवनीश दीक्षित को गिरफतार करके जेल भेज दिया गया। प्रकरण में जिस तरह से प्रशासन ने एक्शन लिया। उसकी चर्चा शहर से लेकर पूरे प्रदेश में है लेकिन एक सबसे बडा सवाल यह है कि कानपुर शहर में मिश्नरियों की अरबों की जमीनें हैं। उनमे कब्जे को लेकर गत एक दशक से कई बार विवाद हुआ और कर्नलगंज और कोतवाली में कई एफआईआर भी दर्ज की गई लेकिन ठोस एक्शन नहीं हुआ। इसी के चलते मामले बढते गए।
इनपुट के अनुसार कानपुर शहर में मिशनरीज की 4 अथारिटी हैं। इनमें लखनउ डायसेस, आगरा डायसेस, मेथाडिस्ट चर्च और वूमेंस वेलफेयर मिशनरीज सोसायटी हैं। इनमें सबसे ज्यादा जमीनें आगरा डायसेस के पास हैं। आगरा डायसेस के अंतर्गत क्राइस्ट चर्च काॅलेज, माल रोड स्थित हाॅस्प्टिल, ऐपफिनी स्कूल चुन्नीगंज, फजलगंज में अरबों खरबों की जमीनें पडी हुई हैं। इनमें आरटी डायस और संजय डायस नाम के कई पदाधिकारियों ने मिलीभगत करके नियम-कायदों को ताक पर रखकर इन लीज्ड वाली जमीनों की बिक्री कर डाली। इनमे सबसे प्रमुख मामला नानाराव पार्क के बगल में वीआईपी रोड पर मिर्जा वालों को जमीन बेंच डाली। वर्तमान में वहां पर बंगले बना दिए गए हैं। इसी तरह से रिजर्ब बैंक के सामने बडे परिसर में गोल्ड जिम, काॅलेज और तमाम लोगों को जमीन बेंचकर करोडों रूप्ए कमाए गए।

मिशनरीज की सभी जमीनों की जांच होनी चाहिए
एक अधिवक्ता ने बताया कि सबसे ज्यादा घालमेल आगरा डायसेस की जमीनो में किया गया है। इन जमीनों की कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर जमकर खरीद फरोख्त की गई है। इसमें कई अधिकारी, नेता और माफिया शामिल हैं। कानपुर जिला प्रशासन ने यदि सही से जांच करवाई तो हकीकत सामने आ जाएगी। ’स्वराज इंडिया संवाददाता’ ने 5 साल पहले इन जमीनों को लेकर कई खबरों पर खुलासा किया था लेकिन सब जिम्मेदार आंख बंद किए हुए थे।
अरबों की जमीन पर कब्जे की जांच को प्रशासनिक टीम गठित
1890 पर लीज पर दिया, जमीन की लीज 2012 में खत्म
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर।
हजार करोड की नजूल की जमीन पर कब्जे और उसके बाद हुए बवाल पर प्रशासन गंभीर है। पूरे मामले की जांच के लिए डीएम राकेश कुमार सिंह ने जांच कमेटी गठित कर दी है। वहीं बेशकीमती जमीन कब्जाने के आरोप में जेल भेजे गए मीडियाकर्मी अवनीश दीक्षित की जमानत अर्जी सोमवार को एसीजेएम प्रथम की कोर्ट ने खारिज कर दी है। डीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जिले में करीब 580 नजूल की संपत्तियां हैं। इसका सत्यापन कराया जाएगा। सिविल लाइंस स्थित जमीन की जांच करने के लिए तीन सदस्यी कमेटी गठित की है। रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी।
जमीन की लीज 2012 में खत्म
सिविल लाइंस स्थित एक हजार करोड़ रुपये की नजूल की जमीन की लीज 2012 में ही खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद चार एकड़ और 1600 वर्गमीटर जमीन पर अवैध तरीके से स्कूल य कब्जे चल रहे है। नजूल की इस जमीन को अक्टूबर 1890 को वूमेंस यूनियन मिशन सोसाइटी ऑफ अमेरिका को लीज पर दिया गया था। उस वक्त प्रति एकड़ प्रति साल 15 रुपये में अमीन पट्टे पर दी गई थी। पहले 96.6 और फिर 25 साल की लीज पर दी गई थी। जमीन की लीज 2012 में खत्म हो चुकी है। इसके बाद से किसी अफसर ने इसपर ध्यान नहीं दिया। 15/62 सिविल लाइंस स्थित इस जमीन में के तीन हिस्से है। 69 नंबर में तीन एकड़ 695 में 1600 वर्गमीटर और 69बी में एक एकड़ जमीन है। सभी संपत्तियों को अलग-अलग वर्ष में लीज पर दिया गया था। लीज समाप्त होनें के बाद इस जमीनों को कितने लोगों को बिक्री की गई इसकी जानकारी प्रशासन के पास नहीं है।
जांच कर डीएम को रिपोर्ट दी थी
लगातार अवैध कब्जों की शिकायत पर 17 अक्तूबर 2010 में तत्कालीन ज्वांइट मजिस्ट्रेट एसडीएम सदर सौम्या अग्रवाल ने जांच कर डीएम को रिपोर्ट दी थी। इसमें साफ कहा था जमीन सोसाइटी को लीज पर दी गई है। इसमें किसी भी तरह की विक्री विना डीएम अनुमति के नहीं होगी। इकरारनामों के आधार पर कोई बैनामा पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद लोग खरीद-खरोख्त करते रहे।
एसडीएम सदर की कमेटी करेगी संपत्ति की जांच
हज़ार करोड़ की जमीन को लेकर डीएम ने जांच कमेटी बना दी है। इसमें एसडीएम सदर प्रखर कुमार, तहसीलदार रितेश कुमार और एसीएम सप्तम सुरेंद्र बहादुर को नामित किया है। जांच कमेटी मौके पर जमीन की हर स्थितियों की तफ्तीश करेगी। वहां पर मौजूद कब्जों, स्टे समेत हर बिन्दू को देखा जाएगा। रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। सभी अवैध कब्जेदारों को हटाकर जमीन को जिला प्रशासन दस्तावेजों में अपने नाम दर्ज कराएगा। कमेटी एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देगी। वहीं जिला प्रशासन के रिकार्ड में नजूल की जमीन के 40 रजिस्टर हैं। जिले में करीब 580 नजूल की संपत्तियां हैं। इनमें कई फ्री होल्ड हो चुकी हैं। सभी संपत्तियों की जांच होगी।
मीडियाकर्मी की जमानत अर्जी खारिज, तलब
जमीन कब्जाने के आरोप में जेल भेजे गए अवनीश दीक्षित की जमानत अर्जी सोमवार को एसीजेएम प्रथम की कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब लेखपाल की ओर से दर्ज करार पर मुकदमें में अवनीश को मंगलवार को कोर्ट ने तलब किया है। वरिष्ठ अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने बताया कि सीजेएम कोर्ट में डकैती के मामले में जमा की गई थी। जिसकी सुनवाई एसीजेएम प्रथम की कोर्ट ने कर उसे खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट में विद्यावती ने दर्ज कराया पहला मुकदमा
मामले की जानकारी विद्यावती राव को होने पर उन्होंने झांसी और लखनऊ सोसाइटी रजिस्ट्रार के खिलाफ हाईकोर्ट में पहला वाद दायर किया। ये अब भी लंबित है।
इस बीच मई-2010 में हरेंद्र मसीह फर्जी कमेटी के साथ मई माह में बाहरी लोगों के साथ प्रवेश किया और कानपुर स्थित विवादित जमीन की नापजोख करने लगा। इसकी जानकारी विद्यावती राव को भी दी गई, तो उन्होंने संस्था द्वारा निर्माण का कोई प्रस्ताव पास न होने की बात कही।
इसके बाद हरेंद्र 5 जुलाई 2010 को 12 से 15 बंदूकधारियों के साथ फिर से स्कूल में दाखिल हुआ। लेकिन जमीन कब्जाने में कामयाब नहीं हो सका।
इस बीच हरेंद्र ने वर्ष-2015 में खुद को संस्था का खजांची बताते हुए कानपुर न्यायालय में सिविल वाद दाखिल किया और जमीन को लेकर पॉवर ऑफ अटॉर्नी प्रस्तुत की और बी फारमर और हरेंद्र ने खुद को पदभार देने की मांग कोर्ट से उठाई।
33 पर रिपोर्ट दर्ज
सिविल लाइंस में स्थित 1000 करोड़ रुपए की जमीन के कब्जाने का मामला बीते 24 सालों से चल रहा है। संस्था से जुड़े झांसी में कार्यरत एक कर्मचारी ने ही सभी जमीनों को हड़पने की साजिश रच डाली। 28 जुलाई को भी जमीन कब्जाने का प्रयास बलपूर्वक किया गया। हालांकि पुलिस ने मामले में हंगामे के बाद 33 पर रिपोर्ट दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेज दिया है।