Friday, April 4, 2025
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लखनऊ- आगरा एक्सप्रेस वे: बाउंड्री फांदकर सफर शुरू करना मजबूरी…

रिज़वान कुरैशी/ स्वराज इंडिया संवाददाता, बिल्हौर(कानपुर)। टोल टैक्स के जरिए प्रतिदिन वाहनों से लाखों रुपए वसूल करने वाली प्रदेश सरकार ने लखनऊ आगरा एक्सप्रेस पर सवारियों की सुविधाओं के नाम पर अपनी आँखें मूंद रखी हैं। यही वजह है कि अरौल से लखनऊ अथवा आगरा आने जाने वाले यात्रियों को बाउंड्री फांदकर रोडवेज बस और दूसरे वाहन पकड़ने पड़ते हैं। जिसमें महिलाओं, बच्चों और मरीजों को खासी दिक्कतों से जूझना पड़ता है।मालूम हो उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे पर अरौल कट के नाम से विधिवत बस का स्टॉपेज बना रखा है। यहां से बस से सवार होने वाले यात्रियों को विधिवत टिकट भी दिया जाता है। इसके बावजूद एक्सप्रेस वे पर यात्री पहुंचेंगे कैसे इसकी चिंता किसी अधिकारी को अभी तक आखिर क्यों नहीं हुई। यह अहम सवाल है जिसका जवाब देने के लिए
एक्सप्रेस वे अथॉरिटी को आगे आना चाहिए।

एक दशक पहले चालू हुआ था एक्सप्रेस वे पर आवागमन

लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे का निर्माण समाजवादी पार्टी की सरकार ने अखिलेश यादव के कार्यकाल में कराया था। यूं तो उनके समय में ही एक्सप्रेस वे चालू हो गया था। हालांकि बाद में भाजपा सरकार आ गई। लेकिन सिस्टम में कोई बदलाव नहीं हुआ। उनके समय में भी लोग बाउंड्री फांदकर सड़क मार्ग तक पहुंचते थे और अब भी बॉउंड्री फांदकर ही लोग सड़क तक पहुंच पाते हैं।

जंग खा रही है एक्सप्रेस वे तक पहुंचने वाली सीढ़ी

बिल्हौर। अरौल कस्बे से दो किलोमीटर पहले आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर पहुंचने के लिए अथॉरिटी ने लोहे की एक सीढ़ी बनवाई है। देखरेख के अभाव में किसी यह सीढ़ी जंग खा रही है। सीढ़ी को देखकर एकबारगी तो यही लगता है कि शायद अथॉरिटी यह ही भूल गया है कि उसने सवारियों के हाईवे तक पहुंचने के लिए सीढ़ी भी बनवा रखी है। वहीं जरा सी चूक होने पर ऊबड़ खाबड़ रास्ता होने के कारण सीढ़ी से उतरते ही आप चोटिल हो सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद कोई देखने वाला नहीं है।

सवारियां बोलीं, नहीं है सुरक्षा का कोई इंतजाम

बिल्हौर। सुनसान जगह पर बने अरोल स्टॉप पर यात्रियों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। जिसके कारण शाम के समय कई बार लूटपाट की घटनाएं भी हो चुकी हैं। कन्नौज के उदैतापुर निवासी ने बताया कि यहां पर कई बार लूटपाट की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद कोई इंतजाम नहीं किया गया। कन्नौज के मानीमऊ निवासी गोपाल दुबे अपनी रिश्तेदार को लखनऊ के लिए बस पर बिठाने आए थे। उसे स्वास्थ्य विभाग में ज्वाइन करना था। उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए दीवार को फांदकर एक्सप्रेस वे तक पहुंचना मुश्किल काम है। यदि कोई मरीज हो तो उसके लिए सवारी पकड़ पाना बिल्कुल असंभव सा है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग अप डाउन करके नौकरी करने आते हैं लेकिन इसके बावजूद इस समस्या का समाधान करने के लिए किसी ने नहीं सोचा।

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