मार्क-थ्री ईवीएम मशीन के कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट आपस में संवाद करने में सक्षम हैं। यदि बाहर से कोई कंट्रोल यूनिट या बैलेट यूनिट लगाई जाएगी, तो इसमें डिजिटल सिग्नेचर मैच नहीं होंगे और सिस्टम काम करना बंद कर देगा।
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
लोकसभा चुनाव में इस बार मार्क-थ्री इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से मतदान होगा। थर्ड जनरेशन की इस आधुनिक मशीन में किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है। अगर किसी ने ऐसा करने का प्रयास किया तो मशीन लॉक हो जाएगी। मार्क-थ्री ईवीएम की चिप को सिर्फ एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है।
चिप के सॉफ्टवेयर कोड को पढ़ा नहीं जा सकता और न ही दोबारा लिखा जा सकता है। इसे इंटरनेट या किसी भी नेटवर्क से कंट्रोल नहीं किया जा सकता है। यदि कोई छेड़छाड़ करेगा या पेच खोलने की कोशिश करेगा, तो मशीन लॉक हो जाएगी। इसमें रियल टाइम क्लॉक और डायनेमिक कोडिंग जैसी विशेषताएं हैं।
इस मशीन की हैकिंग या री-प्रोग्रामिंग नहीं हो सकती है। मशीन को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड बंगलूरू और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड हैदराबाद में तैयार किया गया है। इस मशीन के कंट्रोल यूनिट और बैलेट यूनिट आपस में संवाद करने में सक्षम हैं। यदि बाहर से कोई कंट्रोल यूनिट या बैलेट यूनिट लगाई जाएगी, तो इसमें डिजिटल सिग्नेचर मैच नहीं होंगे और सिस्टम काम करना बंद कर देगा।
सबसे पहले 1998 में हुआ था ईवीएम का उपयोग
ईवीएम बनाने का विचार सबसे पहले 1977 में आया था। नवंबर 1998 में इसका उपयोग किया गया था। ईवीएम मार्क 1 का निर्माण 1989 से 2006 तक हुआ था। दूसरी पीढ़ी के ईवीएम मार्क-2 का निर्माण 2006 से 2012 तक हुआ। अब 2024 की ईवीएम मार्क-थ्री मशीन लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
मार्क-थ्री ईवीएम की मुख्य खासियत
- 24 बैलेट यूनिट और 384 प्रत्याशियों की जानकारी होगी। पहले सिर्फ चार बैलेट यूनिट और 64 प्रत्याशियों की जानकारी ही रखी जा सकती थी। ऐसे में प्रत्याशियों की संख्या बढ़ने पर परेशानी नहीं होगी।
- छोटी-मोटी खराबी आने पर यह स्वयं दुरुस्त कर लेगी। यानि सॉफ्टवेयर में कोई फॉल्ट है, तो यह उसे पकड़ लेगी और डिस्प्ले स्क्रीन पर प्रदर्शित होने लगेगा।
- टेंपर डिटेक्ट एम-थ्री ईवीएम का यह फीचर है। यदि इससे कोई छेड़छाड़ करता है तो यह काम करना बंद कर देगी।