होली का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है और मथुरा की होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। अगर आप भी होली की तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति में हैं तो यह आर्टिकल आपको होली से संबंधित सभी जानकारी देगा। आइए जानते हैं होली कब है और होलिका दहन का मुहूर्त क्या होगा…
स्वराज इंडिया | फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की रात को होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन रंगों वाली होली का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सभी लोग आपसी मतभेद भुलाकर एक दूसरे को रंग लगाते हैं और होली की बधाई देते हैं। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है इसलिए इस पर्व को धूमधाम से पूरे देश में मनाया जाता है। साथ ही इस दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। आइए जानते हैं होलिका दहन का मुहूर्त और पूजा विधि…
होली का महत्व
होली का पर्व समाज से ऊंच-नीच, गरीबी अमीरी का भेदभाव खत्म करता है और इस दिन एक दूसरे को रंग लगाकर गिले शिकवे भूला दिए जाते हैं और गले मिलते हैं। होली का पर्व दो दिन मनाया जाता है, पहले दिन होलिका दहन किया जाता है और दूसरे दिन परिवार और प्रियजनों को अबीर गुलाल लगाया जाता है। होली के मौके पर घर घर नए नए पकवान बनाए जाते हैं और गुझिया खिलाकर मुंह मीठा किया जाता है।
होली से पहले होलाष्टक
होली के त्योहार से आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाते हैं और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। होलाष्टक फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से आरंभ हो जाते हैं और पूर्णिमा तिथि तक रहते हैं। इस बार होलाष्टक 17 मार्च से शुरू होंगे और 24 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त हो जाएंगे। होलाष्टक के दौरान आठ ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं इसलिए होलाष्टक के समय कोई शुभ व मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं।
होली के दिन चंद्र ग्रहण
होली के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। चंद्र ग्रहण 25 मार्च को सुबह 10 बजकर 23 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 3 बजकर 2 मिनट रहेगा। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए होली पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पूर्णिमा तिथि
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 24 मार्च को 9 बजकर 56 मिनट पर शुरू हो रही है और इसका समापन 25 मार्च को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर हो रहा है।
कब है होली?
शास्त्रों में विधान है कि दोनों दिन अगर पूर्णिमा तिथि है तो प्रदोष काल में लगने वाली पूर्णिमा तिथि को भद्रा रहित काल में होलिका दहन किया जाता है। इसलिए इस बार होली का पर्व 24 मार्च को मनाया जाएगा और अगले दिन 25 मार्च को रंगोत्सव का पर्व मनाया जाएगा। 24 मार्च को भद्रा भी लग रही है, इस दिन भद्रा का प्रारंभ सुबह 9 बजकर 54 मिनट से हो रही है, जो रात 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। इसके बाद होलिका दहन किया जा सकता है।
होलिका दहन कब है?
होलिका दहन का मुहूर्त24 मार्च को रात्रि 11 बजकर 13 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ऐसे में आपको केवल 1 घंटा 20 मिनट का होली पूजा का समय मिलेगा।
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन से पहले स्नान करके पूजा वाले स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। फिर गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बनाकर थाली में रोली, फूल, मूंग, नारियल, अक्षत, साबुत हल्दी, बताशे, कच्चा सूत, फल, बताशे और कलश में पानी भरकर रख लें। इसके बाद होलिका की पूजा करें और पूजा की सामग्री को अर्पित करें। साथ ही भगवान नरसिंह और विष्णुजी का नाम लेकर पांच अनाज अर्पित करें। फिर प्रह्लाद का नाम लेकर अनाज के दाने और फूल अर्पित करें। इसके बाद कच्चा सूत लेकर होलिका की सात होलिका की परिक्रमा करें और अंत में गुलाल डालकर जल अर्पित करें। होलिका दहन के बाद उसमें कच्चे आम, सप्तधान्य, नारियल, मुट्टे, मूंग, चना, चावल आदि चीजें अर्पित कर दें।