
–रिट याचिका की सुनवाई में केडीए अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज हाईकोर्ट
–केडीए उपाध्यक्ष 8 जुलाई को वीडियो कांफ्रेसिंग या व्यक्तिगत रूप से होंगे पेश होंगे
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
कानपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्यशैली से हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। एक भूमि मुआवजे की रिट याचिका में कार्रवाई नहीं होने से हाईकोर्ट ने केडीए उपाध्यक्ष को तलब किया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या-21 में रिट याचिका संख्या
60366-2013 कल्लू एवं अन्य 17 बनाम उत्तर प्रदेश और अन्य की सुनवाई चल रही है। इसमें अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट-भूमि अधिग्रहण कानपुर नगर ने केडीए सचिव को एक पत्र भेजा था। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा-28 ए के तहत दिए गए आवार्ड पर याचिकाकर्ताओं को मुआवजा राशि भुगतान 20-03-2024 तक करना था लेकिन अबतक मुआवजा नहीं दिया गया। इसमें पर याचियों ने दोबारा हाईकोर्ट की ओर रूख किया। इसकी सुनवाई 23-05-2024 को हुई। इसमें कोर्ट ने केडीए की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। मुआवजा भुगतान नहीं होने पर केडीए वीसी व्यक्तिगत रूप से 8 जुलाई 2024 को वीडियोकांफ्रेसिंग या कोर्ट में तलब किया गया। सूत्रों ने बताया कि केडीए के विधि विभाग में चल रहे खेल से केडीए अफसरों की छवि खराब हो रही है। यहां पर कई मामलों में केडीए के खिलाफ लगातार आर्डर हो रहे हैं लेकिन विधि विभाग पैरवी करने में फेल साबित हो रहा है।
सदर तहसीलदार के खिलाफ वारंट जारी
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर। हाईकोर्ट ने अवमानना के मामले में हाजिर न होने पर सदर तहसीलदार रितेश कुमार सिंह के खिलाफ वारंट जारी किया है।
गुजैनी निवासी मंजू श्रीवास्तव ने प्रतापपुर में 2018 में एक जमीन खरीदी थी। उनकी मौत के बाद वसीयत के आधार पर यह जमीन अरुण त्रिवेदी को मिली। इस जमीन से जाने वाले रास्ते पर दबंगों ने रोक लगा दी थी। इसपर
तहसीलदार के यहां मुकदमा दाखिल किया गया था। मुकदमे का निस्तारण न होने पर अरुण ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जहां तहसीलदार को नोटिस भेजा गया था ,पर तहसीलदार नहीं पहुंचे। इस पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने तहसीलदार के खिलाफ वारंट जारी कर दिया। सीएमएम को आदेश दिया कि वह एक अगस्त को तहसीलदार को हाईकोर्ट में हाजिर कराएं।