Friday, April 4, 2025
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कानपुर: 10 साल से प्रवक्ता का वेतन उठा रहा शिक्षक

  • रिवर्ट होने के बाद भी दस वर्षों में सरकार के राजस्व को लग गया लाखों रुपए का चूना
  • डीआईओएस कार्यालय के बाबुओं की कारगुजारियो का नया खेल
  • राम सहाय इंटर कालेज बैरी शिवराजपुर से जुड़ा हुआ है पूरा मामला

मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर ।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबुओं की मिलीभगत से राम सहाय इंटर कालेज बैरी, शिवराजपुर में अनुसूचित जाति कोटे से पदोन्नति के बाद पदावनत किए गए एक शिक्षक द्वारा कई वर्षों से निर्धारित वेतन से अधिक वेतन लिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। कागजों में हेराफेरी करके सरकारी धन को चूना लगाए जाने का यह अनूठा मामला तब प्रकाश में आया है जब उक्त शिक्षक ने खुद को वरिष्ठतम बताकर संस्था प्रधान पद सौंपे जाने का प्रत्यावेदन जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में दिया है। जिसकी जांच करके विद्यालय प्रबंधक से आख्या मांगी गई है।
जानकारी के मुताबिक सोहन लाल की प्रथम नियुक्ति दिनांक 18.10.97 को राम सहाय इंटर कालेज बैरी, शिवराजपुर कानपुर नगर में स्नातक वेतन क्रम में अनुसूचित जाति आरक्षण कोटे के अन्तर्गत स0अ0 के पद पर की गई थी। पदोन्नति में अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ देते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक, कानपुर नगर ने पत्र सं0 मा02/35799-800 दिनांक 04.03.2004 के द्वारा सोहन लाल की स्नातक वेतन क्रम से प्रवक्ता वेतन क्रम में पदोन्नति की थी। अभिलेखों के मुताबिक पदोन्नति के समय विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक रघुराज सिंह स्नातक वेतन क्रम की वरिष्ठता सूची में सबसे वरिष्ठ एवं अर्थशास्त्र विषय में पूर्ण अर्ह थे। किन्तु कनिष्ठ अध्यापक सोहनलाल को पदोन्नति में अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ देते हुए पदोन्नति की गई। इस सम्बन्ध में जिला विद्यालय निरीक्षक, कानपुर नगर द्वारा प्रबंधक/प्रधानाचार्य को पत्रांक: मा0-3ए/24120-21/ 2003-04 दिनांक 16.12.2003 प्रेषित कर विक्रमाजीत सिंह अर्थशास्त्र प्रवक्ता के सेवानिवृत्त होने के फलस्वरूप पदोन्नति हेतु अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी के पत्राजात भेजने के निर्देश दिए गए थे। गौरतलब है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कानपुर नगर द्वारा प्रवक्ता अर्थशास्त्र के रिक्त पद पर 50 प्रतिशत कोटे के अन्तर्गत पदोन्नति के सम्बन्ध में पूर्व में पत्रांक/ मा0-3/23797/2003-04 दिनांक 05.12.2003 प्रेषित कर रिक्त अर्थशास्त्र प्रवक्ता का पद सामान्य वर्ग का बताते हुए स0अ0 श्री रघुराज सिंह का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए थे। बाद में इसका संशोधित पत्र जारी किया गया, जिसके फलस्वरूप सोहन लाल (अनु0जाति) की नियुक्ति हुई। स्पष्ट है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय द्वारा प्रवक्ता अर्थशास्त्र का पद पहले सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किया गया लेकिन बाद में इसे अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी के लिए निर्धारित कर दिया गया। जिला विद्यालय निरीक्षक कानपुर नगर के पत्र संख्या मा02/6128-35/2015-16 दिनांक 17.10.2015 के सन्दर्भ में संयुक्त शिक्षा निदेशक कानपुर मण्डल, कानपुर के पत्रांक मा01/8376-81/2015-16 दिनांक 9 सितंबर 2015 द्वारा शिक्षा निदेशक (मा0) उ0प्र0 लखनऊ के पत्रांक: शिविर/ 8428-8544/2015-16 दिनांक 09 सितंबर 2015 के क्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 27.04.2012 के अनुपालन में कार्यवाही किए जाने हेतु शासन के कार्मिक विभाग द्वारा निर्गत शासनादेश संख्या 4/1/2002/टी0सी0-1-का0-2-2012 दिनांक 28.04.2012 एवं शासनादेश संख्या-4/1/2002/टी.सी.-1-का0-2012 दिनांक 13.05.2012 एवं शासनादेश दिनांक 08.05.2012 व 13.05.2012 के माध्यम से पदोन्नति में आरक्षण एवं परिणामी ज्येष्ठता की व्यवस्था समाप्त कर दी गई। जिसके क्रम में संस्थाधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देश निर्गत दिए गए थे। उक्त आदेशों के अनुपालनार्थ दिनांक 18.11.2015 को सोहन लाल प्रवक्ता (अर्थशास्त्र) को स्नातक वेतन क्रम में पदावनत कर दिया गया। लेकिन जि0वि0नि0 कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की सांठगांठ से सोहन लाल स्नातक वेतन क्रम पर पदावनत होने के बावजूद तथ्यों को छिपाकर विगत कई वर्षों से प्रवक्ता ग्रेड का वेतन प्राप्त कर रहे हैं। और इसी को आधार बनाकर अपनी नियुक्ति और पदोन्नति अनूसूचित जाति कोटे से होने का तथ्य छिपाकर अनुचित लाभ प्राप्त करने की मंशा से उच्चाधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जारी अनुसूचित जाति कोटे से पदोन्नति के अनुमोदन का पत्र संख्या मा0-2/35799-800 दिनांक 04.03.2004 इसकी पुष्टि करता है। उक्त आदेशों के आधार पर सोहन लाल को प्रवक्ता पद का वेतनमान दिया जाना स्पष्ट रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व को चूना लगाना है।

बिल्ली के गले में आखिर घंटी बांधे कौन?

मालूम हो कि पत्रांक सं0: 26/2015-16 दिनांक 18.11.2015 के द्वारा तत्कालीन प्रधानाचार्य द्वारा पदोन्नति में अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ प्राप्त सोहन लाल प्रवक्ता (अर्थशास्त्र) को स्नातक वेतन क्रम में पदावनत किए जाने की सूचना देते हुए स्नातक वेतन क्रम में वेतन निर्धारण करने के लिए सम्बन्धित की सेवा पुस्तिका जिला विद्यालय निरीक्षक, कानपुर नगर को भेजी गई थी। 18 नवंबर 2015 को पदावनत किए जाने के बावजूद वर्ष 2016 में सातवेंबि वेतन आयोग के अनुसार उल्लिखित वेतन निर्धारण प्रपत्र पदनाम में कूटरचित ढंग से हेराफेरी करके तैयार किया गया। जिसमें तत्कालीन प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर तो हैं लेकिन और नियमानुसार प्रबंधक के हस्ताक्षर कराए बिना ही प्रवक्ता पद का वेतन निर्धारण कर दिया गया। वर्ष 2021 में भी तत्कालीन प्रधानाचार्य ने प्रवक्ता से स्नातक वेतन क्रम में वेतन निर्धारण करने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को पत्र भेजा। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक/ लेखाधिकारी कार्या0 जि0वि0नि0 कानपुर नगर स्तर पर किन कारणों से सोहन लाल का वेतनमान स्नातक क्रम में निर्धारित न करके लंबित रखा गया। जबकि सर्विस बुक में भी पदावनति का अंकन किया जा चुका है। यह प्रकरण भी अत्यन्त गंभीर है और विभागीय जांच का विषय है। जांच होने पर कई प्रकार की वित्तीय अनियमितताएं प्रकाश में आ सकती हैं।

सरकारी धन को चूना लगाने वाले बेनकाब होंगे- हरिश्चंद्र दीक्षित

माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता हरिश्चंद्र दीक्षित बाबाका कहना है कि मामला बहुत गंभीर है। वह जल्द ही इस प्रकरण में संयुक्त शिक्षा निदेशक से वार्ता करेंगे। जरुरत पड़ी तो शासन के संज्ञान में भी लाएंगे। कहा कि सरकारी धन को चूना लगाने वालों का नकाब उतरते देर नहीं लगेगी। कहा कि इसमें खेल करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सब नपेंगे।

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