कानपुर के पॉश इलाके बिरहाना रोड में धर्मार्थ एंटी ट्यूबरकुलोसिस चिकित्सालय के लिए आजादी के पहले एक लाख रुपये सालाना शुल्क पर दी गई करोड़ों की सरकारी जमीन पर एक संस्था कब्जा जमाए पूर्ण रूप से बैठी है। चिकित्सालय के निर्माण के बजाय सालों से उसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर लाखों रुपये किराया वसूला जा रहा है। मामले का खुलासा होने पर मंडलायुक्त ने केडीए से रिपोर्ट मांगी।
इस पर केडीए ने पट्टाधारक, विधिक उत्तराधिकारी व अध्यासियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। डीएम सर्किल रेट के अनुसार वर्तमान में इस जमीन की कीमत 17.74 करोड़ रुपये है। वहीं, अगर बाजारू भाव देखा जाए तो इसकी कीमत करीब 40.74 करोड़ रुपये है। देश में आजादी के पहले ट्यूबरकुलोसिस (टीबी या तपेदिक) महामारी के रूप में फैली हुई थी।
टीबी रोगियों के इलाज के लिए एक धर्मार्थ चिकित्सालय की स्थापना की जरूरत महसूस हुई। इस पर तत्कालीन कानपुर डेवलपमेंट बोर्ड ने 28 नवंबर 1946 को कानपुर एंटी ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन के सचिव एसपी मेहरा को एक जमीन की लीज डीड की गई, जो नौ दिसंबर 1946 को पंजीकृत हुई। इसके तहत बिरहाना रोड स्थित प्लाट नंबर 28 ए पर निर्मित रजा मंजिल नामक परिसर 24/173 और खाली प्लाट नंबर 28 को 999 वर्ष के लिए पट्टे पर दिया गया।
एसोसिएशन को धर्मार्थ एंटी ट्यूबरकुलोसिस क्लीनिक की स्थापना करनी थी। शर्त यह भी थी कि इस संपत्ति को किसी अन्य उपयोग में नहीं लाया जाएगा।
इसमें अवैध रूप से बिल्डिंग का निर्माण कर वकीलों, चार्टर्ड एकाउंटेंट, प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स, टेलर्स, इलेक्ट्रीशियन आदि को किराये पर दे दिया गया। इसके अलावा टीबी के मरीजों के लिए पार्क की स्थापना के लिए दी गई जमीन पर भी बिल्डिंग का निर्माण कर एक सेंट्रल चेस्ट क्लीनिक की स्थापना की गई।
शिकायत पर मंडलायुक्त ने केडीए से जांच रिपोर्ट मांगी थी। केडीए के विक्रय जोन-वन के विशेष कार्याधिकारी रवि प्रताप सिंह ने अपर आयुक्त को भेजी रिपोर्ट में माना है कि संपत्ति पर आवासीय व व्यावसायिक निर्माण है, जो सालों पहले से बना है और चल रहा है। लीज की शर्तों का उल्लंघन होने के कारण नियमानुसार कार्रवाई के लिए पट्टाधारक, विधिक उत्तराधिकारी व अध्यासियों को नोटिस भेजा है।