-फर्जी रजिस्ट्री के आरोपों में बर्खास्त किए गए लिपिक कंचन गुप्ता को कमिश्नर अमित गुप्ता ने किया दोष मुक्त
-पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी की शिकायत पर हुई जांच के बाद हुई थी कार्रवाई
-फर्जी रजिस्ट्री कांड में फंसे थे केडीए के कई अधिकारी और कर्मचारी
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
कानपुर विकास प्राधिकरण में हुए करोडों रूप्ए के फर्जी रजिस्ट्री कांड में आरोपी बनाए कई अधिकारी और कर्मचारी बहाल होने जा रहे हैं। कमिश्नर कानपुर अमित गुप्ता ने लिपिक कंचन गुप्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए बर्खास्तगी समाप्त कर दी है। अब निलंबन भी जल्द भी खत्म होने संभावनाएं हैं। वैसे, केडीए के फर्जी रजिस्ट्री कांड से प्राधिकरण के राजस्व को करोडों की चपत लगी थी लेकिन सेटिंग-गेटिंग के दम पर मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इनपुट के अनुसार कानपुर के पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी ने शिकायत की थी प्राधिकरण के कई प्लाॅटों की कर्मियों ने मिलीभगत करके फर्जी रजिस्ट्री कर दी गई। इसमें बडे पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए गए थे। इसपर तत्कालीन उपाघ्यक्ष ने जांच कमेटी बनाई। जांच अधिकारी गुणाकेश शर्मा की अगुवाई में फर्जी रजिस्ट्री की जांच में शिकायत के बिंदु लगभग सही पाए गए थे। इसपर कंचन गुप्ता सहित लिपिक निलंबित कर दिए गए थे। इसके बाद तत्कालीन उपाध्यक्ष अरविंद सिंह ने 21 मई 2022 को कंचन गुप्ता को लिपिक पद से बर्खास्त कर दिया था। इसपर कंचन गुप्ता हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए अध्यक्ष यानि कमिश्नर कोर्ट जाने की सलाह दी। इसपर कंचन गुप्ता ने कमिश्नर के यहां अपील की थी, यहां कमिश्नर अमित गुप्ता ने कंचन की बर्खास्तगी खत्म कर दी।
वहीं, इस कांड के बाद जोन-1 में अन्य फर्जी रजिस्ट्रीकांड हुआ था। इसमें तत्कालीन अनुसचिव केसीएम सिंह, लिपिक प्रदीप सविता लेखाकार केएन वर्मा सहित कई अधिकारी और कर्मचारी सस्पेंड हो गए थे। इसमें स्वरूपनगर थाने में मुकदमा पंजीकृत करवाया गया था। मामला ठंडा होने के बाद सभी आरोपी बहाल होने लगे हैं। इसमें इनपुट है कि निलंबित चल रहे लिपिक प्रदीप सविता हाईकोर्ट से बहाल हो गए हैं। बाकी आरोपी भी अपनी सेटिंग में लगे हुए हैं।
