नोन नदी में लगातार जा रहा फैक्ट्रियों का गंदा पानी, जिम्मेदार अधिकारी बेखबर
नदी का पानी हुआ जहरीला, किसानों की फसल हो रही बर्बाद
एक मरती नदी पर मौन साधे कानपुर देहात के अफसर
शंकर सिंह, स्वराज इंडिया
कानपुर देहात। प्रदेश सरकार लगातार नदियों के जल प्रवाह को बढ़ाने एवं जल संरक्षण पर काम करने के लिए जोर दे रही है लेकिन कानपुर देहात में क्षेत्रीय किसानों के लिए वरदान साबित होने वाली नोन नदी जिम्मेदारों की अनदेखी से अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। रनिया और नबीपुर स्थित इंडस्ट्रियल एरिया से आने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी विभिन्न नालों के माध्यम से नदी में गिराया जा रहा है। जिससे नदी की अविरलता प्रभावित हो रही है। फैक्ट्री का निकलता दूषित पानी नदी में जाने से किसानों की फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। इससे क्षेत्रीय किसानो की फसलों को जहां भारी नुकसान हो रहा है। वही फैक्ट्री का पानी नदी में जाने से नदी का पानी भी जहरीला हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार कानपुर देहात में विकासखण्ड सरवन खेड़ा एवं अकबरपुर विकासखंड के किसानों के सिंचाई के लिए निकली हुई नोन नदी पूर्वी
उत्तरी इन दिनों अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। विभागीय अधिकारियों के उदासीनता और लापरवाही के चलते नोन नदी विलुप्त होने के कगार पर पहुंचती जा रही है। जबकि इस नदी से क्षेत्र के सैकड़ों गांव के हजारों एकड़ बीघा जमीन की सिंचाई की जाती थी। जिससे किसानों को लाभ काफी मिलता था। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में नगर पंचायत रनिया की इंडस्ट्रियल एरिया में लगी फैक्ट्री से निकलता दूषित पानी सीधे नदी में छोड़े जाने से नदी का पानी दूषित हो गया है। कभी साफ व पीने योग अविरल धारा के रूप में बहने वाली नदी अब गंदगी का शिकार हो गई है। फैक्ट्री का पानी नदी में जाने से पानी पूरी तरह दूषित होकर जहरीला होने के साथ काला हो गया है। इससे इस पानी से खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। खेतों में क्रोमियम वाला पानी जाने से फसले बर्बाद हो रही हैं लेकिन जिले की गंगा समिति एवं वेटलैंड सम्मिति इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। जिस नदी में गंदा पानी फैक्ट्रियों का आ रहा गांव के ग्रामीण अंचल के लोग बीमार भी हो रहे है।लेकिन प्रशासन से जिला प्रशासन तक कोई इस और ध्यान नही दे रहा है।

सिर्फ योजना बनाते रहे जिले के अधिकारी
जिले के अधिकारी मनरेगा योजना से नदी के जीवन उद्धार की योजना बना रहे हैं लेकिन एक वर्ष गुजरने के बावजूद भी अब तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका है। जिससे कागजों पर ही नदी के जीवन उद्धार की योजना सीमित होकर खत्म होती जा रही है और धरातल पर काम न होने से नदी सिसकने को मजबूर है। गजनेर के रहने वाले शिवम, शिवम गुप्ता, शिवराज सिंह चौहान, राजकरन सिंह ,गोलू दीक्षित, आदर्श बाजपेई, धर्मवीर यादव , राहुल गौतम , देव सिंह ,आधुनिक फैक्ट्री के पानी को नदी में छोड़े जाने पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। साथ ही नदी के जीर्णोद्धार कराए जाने की आवाज उठाई है।
बोले जिम्मेदार…
जिला परियोजना निदेशक बीरेंद्र सिंह व अतिरिक्त प्रभार विकास खंडसरवन खेड़ा ने बताया कि इस संबध में जानकारी मेरे संज्ञान में है। बहुत जल्द ही समस्या का समाधान किया जायेगा।