कानपुर देहात बेसिक शिक्षा विभाग में खेल जारी….तीन वर्ष पूर्व स्थानांतरण में आईं तीन शिक्षिकायें बिना स्कूल जायें उठा रही वेतन
बीएसए आफिस व बीआरसी अकबरपुर से प्रमाणित हो रही उपस्थिति, बीएसए कार्यालय में 25-25 हजार रुपये प्रति माह सुविधा शुल्क लेने का आरोप
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर देहात। कानपुर देहात का बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर से भ्रष्टाचार को लेकर फिर से चर्चाओं में है। तीन वर्ष पूर्व अंतर्जनपदीय स्थानांरण में कानपुर देहात आयी तीन शिक्षिकायें बिना स्कूल जाये वेतन उठा रही हैं। इतना ही नहीं एक शिक्षका की बीएसए कार्यालय तथा दो अन्य शिक्षिकाओं की उपस्थिति अकबरपुर बीआरसी से प्रमाणित हो रही है। विहिप के पूर्व गौरक्षा प्रमुख ने बीएसए पर सुविधा शुल्क लेकर फर्जी उपस्थित प्रमाणित करने का आरोप लगा उच्चाधिकारियों से शिकायत की है।
पूर्व गौरक्षा प्रमुख समाजसेवी आदित्य शुक्ला ने मुख्यमंत्री सहित विभिन्न अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर बताया कि बीएसए कार्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर है। शासनादेशों की अनदेखी आम बात हैं। उन्होंने बताया कि यदि विद्यालय में निरीक्षण के दौरान कोई शिक्षामित्र, शिक्षक व अनुदेशक दस मिनट भी देर से पहुंचता है तो उसका वेतन/मानदेय रोक दिया जाता है और उसका उत्पीडन किया जाता है। इसके बाद जांच के नाम पर उसका शोषण होता है और बाद में उसका वेतन बहाल कर दिया जाता है। आखिरी यह भी नहीं पता चलता कि पीड़ित शिक्षक गलत है या फिर निरीक्षणकर्ता सुविधा शुल्क के बाद सब कुछ ठीक हो जाता है। ऐसा ही दातों तले उंगली दबाने वाला मामला सामने आया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में अंतर्जनपदीय स्थानांन्तरण में तीन शिक्षिकायें 1-रिचा वर्मा 2- रानी झां 3- महरीन अख्तर कानपुर देहात आयी थी। जिन्हें तीन वर्ष वर्ष से अधिक समय होने के बाद अभी तक विद्यालय आवंटित नहीं किया गया। जबकि जनपद के पिछड़े ब्लाकों में कई विद्यालय शून्य है। वहीं रिचा वर्मा व रानी झा की उपस्थित अकबरपुर बीआरसी से तथा शिक्षिका महरीन अख्तर को बीएसए कार्यालय में उपस्थित दर्शाकर उपस्थिति प्रमाणित की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि इन शिक्षकाओं को विद्यालय आवंटित नहीं हुआ था तो शासन में प्रबल पैरवी कर विद्यालय आवंटित कराना बीएसए की जिम्मेदारी थी। साथ ही कहा कि जनपद के विभिन्न पिछ़डे़ विकास खंडों में दर्जनों शिक्षक विहीन विद्यालय है। इस शिक्षिकाओं को उन उन स्कूलों में संबद्ध कर शिक्षण कार्य कराया जाना चाहिए था। वहीं बीएसए कार्यालय के कर्मचारियों ने दबी जुबान से बताया कि उक्त शिक्षिकाओ को उन्होंने देखा तक नहीं। उन्होंने बीएसए कार्यालय पर प्रतिमाह सुविधा शुल्क लेकर उक्त शिक्षिकाओं का वेतन निकलवाने का आरोप लगाया हैं साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षिका की बीएसए कार्यालय में उपस्थिति कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में देखी जा सकती है । उन्होंने मुख्यमंत्री सहित अफसरों से प्रकरण में दोषियों पर कार्यवाही के साथ ही उक्त शिशिक्षकाओं की पदस्थापना तत्काल पिछड़े विकास खंडों के शिक्षकविहीन विद्यालयों में कराने की मांग की है। जिससे शिक्षा के स्तर को सुधारा जा सके।
पिछड़े विकासखंडों में शून्य/एकल दर्जनोें विद्यालय है।
ये हैं टीचर्स…
जिले में तीन शिक्षिकायें रिचा वर्मा, रानी झा व महरीन अख्यतर बिना स्कूल जाये तीन वर्ष से वेतन उठा रही है और तो और बीएसए कार्यालय व बीआरसी अकबरपुर ही उपस्थिति प्रमाणित कर वेतन निकलवा रही है। उनका कहना है बीएसए की जिम्मेदारी थी कि वह विभाग में पहल कर उक्त शिक्षकाओं की पदास्थापना दूरस्थ पिछड़े ब्लाकों के बंद/एकल विद्यालयों में पदस्थापना कराये। जिससे शिक्षा का स्तर सुधारा जा सके।
पांच मिनट विलंब से पहुंचने पर शिक्षकों पर होती है कार्यवाही
कानपुर देहात। जिले में बीएसए, सभी खंड शिक्षाधिकारियों, टास्क फोर्स आदि के विद्यालयों में निरीक्षण अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान यदि कोई शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक पांच मिनअ देर से स्कूल पहुंचता है तो उसका वेतन रोक दिया जाता है या निलंबित कर दिया जाता है। भ्रष्टाचार का जीता जागता उदाहरण कि उक्त तीनों शिक्षिकायें तीन वर्षो से बिना स्कूल जाये वेतन उठा रही है।
क्या कहती है बीएसए
बीएसए रिद्धि पांडेय का कहना है कि सहायक शिक्षिका रानी झा स.अ. एवं ऋचा वर्मा व महरीन अख्तर अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण के अन्तर्गत वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए सुनील दत्त के समय जनपद आयी थी। किन्तु ऑनलाइन विद्यालय आंवटन प्रकिया पोर्टल पर प्रदर्शित न होने के चते विद्यालय का चयन नहीं हो सका। जिसके बाबत सचिव उप्र बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज को अवगत कराया गया था। बीएसए कार्यालय बीआरसी अकबरपुर से उपस्थित प्रमाणित किये जाने का उत्तर शायद उनके भी पास नहीं है।
फर्जी उपस्थित प्रमाणित करने संबंधित नहीं है कोई जवाब
कानपुर देहात। अंतर्जनपदीय स्थानांरण से वर्ष 2021 में कानपुर देहात आयी स.अ. रिचा वर्मा, रानी झा तथा महरीन अख्तर का वेतन बिना शिक्षण कार्य किये दिया जा रहा है। बीएसए पोर्टल की खामी के चलते विद्यालय आवंटन न होने की बात कह रही है। इस शिक्षिकाओं को पिछड़े विकास खंड के बंद विद्यालयों में संबंद्ध कर शिक्षण कार्य कराने तथा विभाग स्तर पर पैरवी कर विद्यालय आवंटन कराने के प्रयास व बीएसए कार्यालय व बीआरसी अकबरपुर से फर्जी उपस्थित प्रमाणित करने के सवाल का जबाब अफसरों पर नहीं है।
उपस्थिति प्रमाणित करने के नाम पर उगाही का आरोप
कानपुर देहात। पूर्व गौरक्षा प्रमुख आदित्य शुक्ल ने मुख्यमंत्री सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शिकायत पत्र देकर बीएसए रिद्धि पांडेय पर स्कूल न जाने वाली तीनों शिक्षकाओं से 25-25 हजार रुपये सुविधा शुल्क लेकर फर्जी उपस्थिति प्रमाणित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि पोर्टल की खामी के चलते विद्यालय आवंटित न होने पर उन्हें व्यवस्था सुधारने के लिस इन तीनों शिक्षिकाओं को पिछड़े विका खंडों के एकल व बंद विद्यालयों में सबद्ध कर शिक्षण कार्य करना चाहिये था। किंतु बीएसए द्वारा ऐसा नहीं किया सुविधा शुल्क लेकर फर्जी तरीके से बिना कार्य के फर्जी उपस्थिति प्रमाणित कर वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने बीएसए कार्यालय के सीसीटीवी कैमरों से इसका सत्यापन कराये जाने की बात कही है।