केडीए मास्टर प्लान की सड़क ही गायब
-सूत्रों का दावा है कि कानपुर सिटी के मास्टर प्लान की 45 मीटर सडक में प्लाट काट कर बेंच डाले गए
-मामला खुला तो माफियाओं ने दूसरी जगह जमीन छोडी
-नारामउ स्थित न्यू हाइवे सिटी योजना में मनमाने ढंग से प्लाटिंग बनाकर सरकारी नियम कायदों की उडाई गई धज्जियां
-केडीए बोर्ड सदस्य धीरू त्रिपाठी की शिकायत के बाद चल रही जांच
-कानपुर शहर में प्राइवेट बिल्डर की सबसे बडी मनमानी
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
आईआइटी कल्यानपुर के पास नारामउ में प्राइवेट बिल्डर द्वारा 50 एकड से अधिक जमीन में प्लाट विकसित कर बेंचे जा रहे हैं। इसमे बडे पैमाने की धांधली सामने आई है। डेवलपर ने कानपुर विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान की 45 मीटर सडक पर प्लाट बनाकर बेंच दिया। मामला खुला तो बचने के लिए दूसरी साइड आधी जगह छोडी गई है। रियल इस्टेट कारोबारी और केडीए अफसरों की मिलीभगत से कार्रवाई के नाम पर खानापूरी अभी भी जा रही है।
कानपुर विकास प्राधिकरण और सरकार के आंखों में धूल झोककर न्यू हाइवे सिटी संचालकों ने करोडों रूप्ए राजस्व को चूना लगाया है। यहां प्लाटिंग एरिया के अंदर सरकारी चकरोड, नाली आदि पर कब्जा करके प्लाट में बेंच दिया गया। केडीए से मिले इनपुट के मुताबिक 23 जून 2020 को केडीए तत्कालीन के टाउन प्लानर ज्योति प्रसाद के हस्ताक्षर से न्यू हाइवे सिटी में करीब 45 हजार मीटर का लेआउट स्वीकृत किया गया। इसमें 45 मीटर की केडीए मास्टर प्लान कीसडक दर्ज है लेकिन मौके पर आधी सडक पर प्लाट काटे जा चुके हैं। बताया गया है कि बचाव के लिए दूसरी जगह जमीन छोडने की बात कही गई है लेकिन मास्टर प्लान के साथ छेडछाड कैसे की गई। केडीए इस मामले में अभी भी चुप्पी साधे बैठा है। बीजेपी पार्षद व केडीए बोर्ड सदस्य धीरेंद्र त्रिपाठी उर्फ धीरू ने कानपुर में हो रहे मनमाने विकास कार्यो एवं निजी परियोजनाओं को लेकर शिकायत कमिश्नर से की थी। इसके बाद सक्रिय हुए केडीए अफसरों ने उप्र नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 के अंतर्गत धारा 27 एवं 28 की कागजी कार्रवाई कर बिठूर पुलिस को पत्र भेजकर इतिश्री कर ली। जब कि काम अभी तक नहीं रोका गया है। केडीए के अधिकारी सख्ती के साथ कार्रवाई करने से हिचक रहे हैं। जब कि शहर में जमीन घोटाले में सबसे बडा मामला खुलकर आया है। इसके बाद भी अधिकारी कन्नी काट रहे हैं। जोन-1 के प्रवर्तन प्रभारी ओएसडी डा0 रवि प्रताप सिंह ने बताया कि 23 अप्रैल 2024 को पत्र बिठूर थाना प्रभारी को भेजकर काम रोकने के लिए कहा गया था लेकिन अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं 19 अप्रैल 2024 को दोबारा पत्र पुलिस को जारी किया गया है। उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
सहारा की बंधक जमीन की कैसे हुई खरीद फरोख्त
केडीए सूत्रों का दावा है कि पूर्व में यह जमीन सहारा इंडिया कंपनी के पास थी लेकिन जब सेबी और ईडी की कार्रवाई में सहारा कंपनी फंसी तो उसने यह जमीन न्यू हाइवे सिटी संचालकों को बेंच दिया गया। तब तक से लगातार यहां पर प्लाटों की बिक्री की जा रही है। बताया जा रहा है कि सहारा इंडिया पर केंद्रीय एंजेसियों की कार्रवाई के दौरान यह जमीन भी बंधक बनाई गई थी। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। इस संबंध में न्यू हाइवे सिटी से जुडे निदेशकों से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो सकी।