सवारी कम लगेज ज्यादा ढो रहीं टूरिस्ट बसें
-कानपुर में रोजाना टूरिस्ट बसों से दूसरे शहरों से बडी मात्रा में आता है सामान
-नियमों को ताकपर रखकर टूरिस्ट बसों की छत से लेकर अंदर तक भरा जाता है सामान
-सिर्फ महीना वसूला तक सीमित एआरटीओ प्रवर्तन दस्ता
-पुलिस की सेटिंग से भी चलता है खुला खेल
मुख्य संवाददाता, स्वराज इंडिया
कानपुर।
सवारियों को लाने और ले जाने के लिए लक्जरी टूरिस्ट बसें देश के गई शहरों से आती जाती हैं। इन बसों में सबसे खास बात यह है कि सवारियां कम लेकिन सामान छत से लेकर अंदर तक ठूंस-ठूंसकर भरा जा रहा है। नियम कायदों को ताकपर हो रहे परिवहन को रोकने के लिए एआरटीओ सहित अन्य दस्ते कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। वजह साफ है कि ट्रेवेल्स एंजेसियों का महीने का वसूली पैकेज तय है। इससे कोई रोकने टोकने वाला नहीं है।
यूपी में योगी सरकार का डंका चल रहा है लेकिन सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की जडे काफी गहरी हैं। कानपुर सिटी में फजलगंज, विजयनगर, नौबस्ता, रामादेवी, झकरकटी बस अडडा सहित कई हिस्सों में ट्रेवल्स एंजेसियां सक्रिय हैं। यहां से देश के दिल्ली, मुंबई, गुजरात, एमपी, राजस्थान सहित अन्य शहरों के लिए लक्जरी टूरिस्ट बसें चलती हैं। कानपुर में फजलगंज इसका सबसे बडा हब है। यहां पर दो दर्जन से ज्यादा टूर एंड टे्रवेल्स एंजेसियां सक्रिय हैं।

’स्वराज इंडिया’ न्यूज पेपर की पडताल में खुलासा हुआ है कि सवारियों के साथ साथ माल भाडे की बुकिंग बड़े पैमाने पर की जाती है। दनादन बस की छतों और सवारियों की सीटों और गेलरी में सामान लादा जा रहा है। जांच के नाम पर एआरटीओ प्रवर्तन क्या कर रहा है, यह भगवान मालिक है।
न्यू सहारा की बस में लादा गया था ठूंसकर लगेज
कालपी रोड पर दर्शनपुरवा में न्यू सहारा बस सर्विस नाम से कार्यालय चलाया जा रहा है। यहां पर बडे पैमाने पर माल बस में लोड करने के लिए रखा गया। वहीं, रविवार को करीब 11 बजे इंदौर से आई बस में भी सामान उपर तक लोड था, कुछ गत्ते अंदर रखे गए थे। यह हाल अन्य एंजेसियों का भी है। खुलेआम सवारियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड किया जा रहा है।
’स्वराज इंडिया’ की जारी रहेगी रिपोर्टिंग
सवारियों के आड में माल भाडे के परिवहन को लेकर स्वराज इंडिया की पडताल लगातार जारी रहेगी। अन्य बडी टे्रवेल्स एंजेसियों और एआरटीओ, पुलिस सिंडीकेट का खुलासा किया जाएगा। एआरटीओ में कौन लोग हैं जो कि सेटिंग गेटिंग का खेल कर रहे हैं। सरकार के राजस्व को चूना लगाया जा रहा है।
