Friday, April 4, 2025
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कानपुर के तेज तर्रार कमिश्नर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमित गुप्ता से स्वराज इंडिया संवाददाता से हुई खास बातचीत

केडीए में 1359 फसली से होगा लैंड ऑडिट

-जनता दर्शन और आईजीआरएस को और प्रभावी बनाया जा रहा है

अनूप अवस्थी, स्वराज इंडिया
कानपुर।
कानपुर के मंडलायुक्त तेजतर्रार आईएएस अधिकारी अमित गुप्ता कानपुर शहर के विकास और नवाचार को लेकर चिंतित दिखते हैं। उन्होने शहर दर्शन योजना चलाकर गरीब और ग्रामीणांचल के बच्चों के लिए टूरिंग का मौका दे रहे हैं। इसके अलावा शहर में सरकारी जमीनों के बंदरबांट को लेकर उन्होने साफ कहा कि यहां हम केडीए की जमीनों का लैंड आडिट करा रहे हैं। इसके बाद दूध का दूध, पानी का पानी होगा। स्वराज इंडिया संवाददाता से खास बातचीत के दौरान कुछ बिंदुओं पर अहम जानकारी दी।

-शहर दर्शन योजना कितनी सफल हुई ?

शहर दर्शन योजना एक प्रयोग है। इसमें आर्थिक रूप से गरीब बच्चे जो शहर में नहीं घूम पाते थे, वह आसानी से पैकेज में आकर घूम सकते हैं। कई ऐसे बच्चे हैं जिन्होने बताया कि कानपुर शहर सिर्फ इलाज कराने या अन्य काम से ही आए लेकिन घूम नहीं सके। इस योजना से शहर में घूमने को मिला। उन्होने बताया कि गंगा बैराज पर फलोटिंग रेस्टोरेंट शुरू होने वाला है। शहर दर्शन योजना से आने वाले बच्चों को कम कीमत में टिकट दिया जा रहा है।

-केडीए में लैंड बैंक नहीं है, आपके पास क्या योजना हैं?

कानपुर यूपी का सबसे महत्वपूर्ण शहर है। केडीए के पास ही शहर की जमीनों का बंदोबस्त और रखरखाव है। हम 1359 फसली रिकार्ड से लैंड आडिट करा रहे हैं। इसमें यह देखा जाएगा कि प्राधिकरण लैंड, सुरक्षित जमीनें कहां गई। यदि किसी में कोर्ट के आदेश से नामांतरण हुआ है तो उसकी समीक्षा की जाएगी। चारागाह, खलिहान, तालाब की जमीनें कहां गई यह देखा जा रहा है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी।

-केडीए में फर्जी रजिस्ट्री से राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया, जांच में फंसे दोषी बहाल हो रहे हैं?

हम भी चाहते हैं कि किसी भी दशा में दोषी बहाल नहीं हो, उसको कडी से कडी सजा मिले। कानपुर विकास प्राधिकरण के फर्जी रजिस्ट्री मामले में जांच सही से नहीं की गई है। इसके लिए उच्चाधिकारी जिम्मेदार हैं। हमने पत्रावलियों में देखा कि बाबू की रिपोर्ट पर ही अधिकारी साइन कर रहे हैं, कोई क्वेरी नहीं है। कार्रवाई सभी पर समान होनी चाहिए। इसलिए हमने फर्जी रजिस्ट्री केस की जांच के लिए उपाध्यक्ष केडीए को 1 माह का समय दिया है। इसमें अधिकारी भी दोषी है तो उनको भी शामिल किया जाए। अगर, हम बहाल नहीं करते तो कोर्ट तुरंत कर देता क्यों कि ऐसे प्वाइंट फाइल में छोडे गए।

-कमिश्नरी में राजस्व वादों के निस्तारण में ढिलाई हो रही है ?

ऐसा नहीं है। हम मेरिट के आधार पर मुकदमों का निस्तारण करा रहे हैं। जिनमें स्टे हैं, ऐसे मामले त्वरित सुनवाई के लिए रखवा रहा हूं। हमारे यहां 7 से 2 साल पुराने मामले ही सुनवाई में हैं। बाकी अन्य जिलों में 10-15 साल से मामले लंबित हैं, यह चेक कर सकते हैं। हम मुकदमों के निस्तारण में तेजी कर रहे हैं।

-केडीए पुलिस पत्र भेजकर कार्रवाई की इतिश्री कर लेता है?

-प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी जानबूझ कर ऐसा करते हैं। बडे मामले छोड दें तो प्रवर्तन अपने दस्ते से कार्रवाई कर सकता है। कबतक पुलिस फोर्स का इंतजार किया जाएगा। उपाध्यक्ष से कहा गया है कि अपने सुरक्षा दस्ते का अधिक से अधिक यूज करें। पुलिस पत्र भेजकर खानापूरी नहीं करें।

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