स्वराज इंडिया न्यूज | करदाताओं को यह भी ध्यान देना चाहिए कि आयकर में निवेश करके मिलने वाली छूट सिर्फ उन्हें मिलेंगी जो पुरानी कर प्रणाली को अपनाएंगे। धारा 80सी के तहत सकल कुल आय से कटौती की छूट अधिकतम एक लाख पचास हजार तक मिलेगी। बीमा की रसीदें वेतन से काटा गया भविष्य निधि अंशदान राष्ट्रीय बचत पत्र पांच वर्ष की सावधि को इसमें शामिल किया जा सकता है।
यह शहर होली को पसंद करने वालों का शहर है। होली के एक सप्ताह पहले से रंगों का खुमार चढ़ना शुरू हो जाता है और एक सप्ताह बाद तक यही माहौल बना रहता है। फिर वह चाहे कारोबारी हो या आम कर्मचारी लेकिन होली के इसी हुल्लड़ के बीच आपको यह भी याद रखना है कि वित्तीय वर्ष खत्म हो रहा है और आपको अपनी आय में से निवेश की राशि पर छूट चाहिए तो यह निवेश भी 31 मार्च तक हो जाने चाहिए।
जैसे-जैसे होली करीब आ रही है लोग अपने घर जाने की तैयारी में जुटे हैं। जो यही रहते हैं, वे होली की तैयारी में जुटे हैं। 25 मार्च को होली है और 30 मार्च को गंगा मेला। इस बीच थोक बाजार तो बंद रहते ही हैं। इसके बाद 31 मार्च को रविवार है। ऐसे में थोक कारोबारियों को तो खासतौर पर होली के पहले ही अपने निवेश कर लेने चाहिए क्योंकि उसके बाद बाजार बंद होने की वजह से कई दिक्कतें आ सकती हैं।
दूसरी ओर नौकरी पेशा लोगों को भी निवेश का ध्यान रखना चाहिए। अगर आप भी आयकर की सीमा में आते हैं तो याद रखें कि आप अपने निवेश 31 मार्च तक जरूर कर दें। इसके बाद निवेश करने पर आपको अपने निवेश पर आयकर की छूट का कोई लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि उस निवेश को वित्तीय वर्ष 2024-25 में किया गया माना जाएगा।
करदाताओं को इस बात का रखना है ख्याल
करदाताओं को यह भी ध्यान देना चाहिए कि आयकर में निवेश करके मिलने वाली छूट सिर्फ उन्हें मिलेंगी जो पुरानी कर प्रणाली को अपनाएंगे। धारा 80सी के तहत सकल कुल आय से कटौती की छूट अधिकतम एक लाख पचास हजार तक मिलेगी। बीमा की रसीदें, वेतन से काटा गया भविष्य निधि अंशदान, राष्ट्रीय बचत पत्र, पांच वर्ष की सावधि को इसमें शामिल किया जा सकता है।
सरकार से अनुमोदित म्युचुअल फंड पर भी छूट ली जा सकती है। किसी शिक्षण संस्थान, विद्यालय, कालेज को दी गई बच्चों की फीस पर भी यह छूट मिलती है। सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के पूर्व सभापति दीप कुमार मिश्रा के मुताबिक निवेश पर बहुत से तरीकों से छूट हासिल होती है लेकिन जरूरी यह जानना है कि इसे वित्तीय वर्ष की अंतिम तारीख यानी 31 मार्च तक कर दिया जाए। व्यस्तता या लापरवाही आपके टैक्स को बढ़ा सकती है।