Friday, April 4, 2025
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अयोध्या : निजी स्कूल संचालको की मनमानी कैसे रुकेगी योगी जी किताबों की कमीशनखोरी ने बिगाड़ी अभिभावकों की हालत

इस सत्र में 10 से 15 प्रतिशत फिर बढ़े कापी किताबों के दाम

9वीं से 12वीं तक की पुस्तकों को खरीदने में छूट रहे अभिभावकों के पसीने

प्रकाशकों से 50 से 70 प्रतिशत कमीशन ले रहे स्कूल संचालक

स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
अयोध्या।
2 अप्रैल से निजी स्कूलों में नए सत्र की पढ़ाई शुरू हो रही है। इसके साथ ही अभिभावकों की पेशानी पर बल भी पड़ गए हैं। कारण बच्चों की किताब-कॉपियों का बोझ है। इनकी बढ़ी कीमतें जेब पर भारी पड़ रही हैं।

सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की किताबों के कुछ निजी प्रकाशकों ने 10 फीसदी तक दाम बढ़ा दिए हैं। कॉपियों की कीमतें भी 15 फीसदी तक बढ़ी है। निजी प्रकाशकों ने नई डिजाइन, बेहतर प्रिंट और क्वालिटी के नाम पर अभिभावकों पर बोझ डाल दिया है। दुकानदार भी एमआरपी पर छूट देने से साफ इनकार कर दे रहे हैं। रिकाबगंज, चौक में किताब, कॉपी की दुकानों पर ग्राहकों से इसे लेकर बहस भी हो रही है। यह हाल तब है जबकि मिलों ने दाम नही बढ़ाए हैं। निजी प्रकाशकों ने डिजाइन और क्वालिटी के नाम पर भी मूल्य बढ़ा दिए हैं। 9वीं से 12वीं तक की पुस्तकों को खरीदने में तो अभिभावकों का पसीना छूट रहा है। हाल ये है की बेसिक मान्यता वाले निजी विद्यालयों की पांच की किताब-कॉपी का खर्च करीब 4000 से 4200 रुपये के आसपास है। जबकि इसी कक्षा में सीबीएसई बोर्ड के कुछनिजी स्कूलों की किताबें करीब 5000 रुपये बैठ रही है। सीबीएसई में कक्षा 9 की किताबों का सेट 6500 से बढ़कर 7500 हजार रुपये के आसपास हो गया है।

कक्षा 9 से 12वीं तक की किताबों के दाम अधिक बढ़े हैं। नर्सरी से आठवीं कक्षा तक की पाठ्य पुस्तकों के अलावा स्टेशनरी के दाम में भी इजाफा हुआ है। कक्षा एक से आठ तक की किताब, कॉपी खरीदने में अभिभावकों पर 500 से 1500 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ बढ्ढ़ा है। यदि स्टेशनरी भी शामिल की जाए तो यह दबाव तीन हजार रुपये तक (प्रति विद्यार्थी) बढ़ा है। सबसे ज्यादा कीमत सीबीएसई बोर्ड के निजी प्रकाशकों की किताबों की बढ़ी है। आईसीएसई बोर्ड की किताबों की कीमतें भी बढ़ी हैं।

निजी स्कूलों में चलता है कमीशन का खेलः
किताब के दुकानदारों की माने तो जो भी निजी स्कूल हैं उनको किताबों के कुल मूल्य का 50 से 70 प्रतिशत कमीशन स्कूल संचालक को देना पड़ता है तभी यह लोग उस प्रकाशक की किताबें लगाते हैं। हाल यह है की किताबे लगने से पहले ही मोटी रकम स्कूल संचालक जमा करा लेते है तब प्रकाशक को ओके बोलते हैं।

हर साल किताबें बदलनेका भी खेलः
मोटी रकम कमाने के चक्कर में यह स्कूल संचालक हर साल किताबें बदल देते है। इससे उन्हेंहरसाल प्रकाशक से अच्छी खासी रकम मिल जाती है।

क्या बोले अभिभावक
नया घाट निवासी प्रमोद पांडेय ने कहा कि फीस में भी निजी स्कूल लगातार वृद्धि कर रहे हैं। दाम बहुत बढ़े हुए हैं। सरकार का प्रकाशकों पर और निजी स्कूलों पर कोई अंकुश नहीं है।

क्या बोले बुक डिपो संचालक
रिकाबगंज के बुक स्टोर के संचालक ने बताया की कॉपी किताबों के दाम में करीब दस प्रतिशत वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर जो 175 पेज की कॉपी पहले 35 रुपए की थी अब 50 रुपए की है। अन्य कॉपियों में पेज कम कर दिए गया है। जो कॉपी 175 पेज की थी अब 140 पेज की है दाम वही हैं।

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