Friday, April 4, 2025
Homeराज्यउत्तर प्रदेशकानपुर में हेमलता अकेले ही ‘जला रहीं शिक्षा की अलख’

कानपुर में हेमलता अकेले ही ‘जला रहीं शिक्षा की अलख’

शिक्षक दिवस पर विशेष….

ककवन के निबौरी स्कूल में 57 बच्चों का भविष्य संवारने में लगी हेमलता

  • बीमारी में छुट्टी लेने पर भेजा जाता है दूसरे स्कूल का टीचर
  • फौलादी इरादों के आगे समस्याएं पीछे छूटीं
  • स्कूल की छात्रा सिमरन का हो चुका है नवोदय में चयन

रिज़वान क़ुरैशी/ स्वराज इंडिया

बिल्हौर (कानपुर)। अति पिछड़े विकास खण्ड में गिना जाने वाले ककवन विकास खण्ड में अपनी नियुक्ति को अधिकांश सरकारी कर्मचारी किसी अभिशाप से कम नहीं मानते हैं। लेकिन हिम के जैसे इरादों वाली हेमलता सिंह की कोशिशें प्राथमिक विद्यालय निबौरी के लिए वरदान बन गई हैं। हेमलता अकेले दम पर अपने स्कूल के 57 बच्चों का भविष्य बुन रही हैं। किसी भी स्कूल में अकेला होना किसी अभिशाप से कम नहीं गया। लेकिन हेमलता ने कभी भी अपने मन में नकारात्मक विचारों को नहीं पनपने दिया। वह अकेले दम पर बच्चों को लायक बनाने के लिए जूझ रही हैं।
मूलरूप से रायबरेली निवासी हेमलता सिंह की पहली नियुक्ति अपने गृह जनपद में ही हो गई। जिस पर उन्होंने करीब दो साल तक वहीं पढ़ाया। वर्ष 2009 में शादी हुई। शादी होने के बाद वर्ष 2012 में कानपुर नगर में ट्रांसफर ले लिया। और प्राथमिक विद्यालय निबौरी में नियुक्ति मिल गई। इनके पति फर्रुखाबाद के एक इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। कानपुर में महाराणा प्रताप कॉलेज के पास निवास बनाकर रह रही हैं। लेकिन स्कूल से इतनी दूरी होने के बावजूद वह हमेशा समय से स्कूल पहुंचती हैं। उनके मन में सदैव ही बच्चों का ख्याल बना रहता है। इनकी 12 वर्ष की अग्रिमा और 9 वर्ष का बेटा आदित्य है। वह सरकारी स्कूल के इन बच्चों और अपने बच्चों में कोई भेद नहीं रखतीं। यूँ तो 2017 में विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक सतेंद्र मिश्र की नियुक्ति हुई। लेकिन वह कुछ समय ही स्कूल में रह पाए। इसके पहले वह शिवराजपुर में एआरपी थे। चार वर्ष पहले बिल्हौर में एआरपी बन जाने के कारण उन्हें स्कूल से कार्यमुक्त कर दिया गया। हालांकि सरकारी आंकड़ों में आज भी वह विद्यालय में हैं लेकिन हकीकत से कोसों दूर। तब से हेमलता अकेले दम पर काम कर रही हैं। स्कूल में किसी शिक्षामित्र की भी नियुक्ति नहीं है। जिसके कारण बीमार होने या जरूरी काम होने पर खण्ड शिक्षा अधिकारी को अवगत कराना पड़ता है। इसके बाद किसी दूसरे स्कूल के टीचर को यहाँ पर व्यवस्था संभालने के लिए भेजा जाता है।


स्कूल की छात्रा पटरैया निवासी सिमरन का वर्ष 2023-24 में नवोदय में चयन हुआ था। उन्होंने बताया कि वह पढ़ने में बहुत होशियार थी। हेमलता बेहद संजीदगी से बताती हैं कि ज़ब कोई नई नियुक्ति होती है तो कुछ उम्मीद जागती है कि शायद कोई और टीचर आ जाए तो कुछ बेहतर कर सकूँ। लेकिन सरकारी कागजो में दो टीचर दिखते हैं जिसके कारण कोई नया टीचर नहीं आ पाता।


अकेले हैं तो क्या गम है

अकेले हैं तो क्या गम है…कुछ इसी तरह की लाइनों को मन में रखकर काम करने वाली हेमलता सिंह अपने विद्यालय में सारी गतिविधियों को अंजाम देती हैं। उन्हें हर बच्चे की फिकर रहती है। गांव में भी लोग उनकी मेहनत की तारीफ करते हैं। बच्चों के अभिभावकों का भी उनसे गहरा जुड़ाव है।

………..

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!