
आगरा: आगरा के शमसाबाद मार्ग से सटे मारुति सिटी रोड पर पकड़ी गई फैक्टरी से नकली घी की सप्लाई 7 राज्यों के 19 जिलों में हो रही थी। प्रतिदिन 50 किलोग्राम से एक कुंतल तक घी तैयार किया जाता था। नकली घी बनाने में एक्सायर्ड घी का प्रयोग भी किया जाता था। यह बात गिरफ्तार फैक्टरी मैनेजर से पूछताछ में सामने आई है। उसके व्हाट्स से भी सप्लायरों के बारे में पता चला है। पुलिस अब सप्लायरों के साथ मालिक की तलाश में लगी है।
मारुति सिटी रोड स्थित मारुति प्रभासम कालोनी में राजेश अग्रवाल के प्लाट में टिनशेड डालकर नकली देसी घी की फैक्टरी चलते पकड़ी गई थी। फैक्टरी में अमूल, पंतजलि, कृष्णा सहित करीब 18 ब्रांड के नाम से देसी घी बनाया जा रहा था। नकली और अपमिश्रित घी को ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में पैक करके बाजार में बेचा जाता था। पुलिस ने करोड़ों का माल जब्त किया था।
मामले में धोखाधड़ी और भारतीय खाद्य मानक सुरक्षा अधिनियम की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। शुक्रवार को मैनेजर राजेश भारद्वाज, टेक्नीशियन शिव चरण, भास्कर गौतम, रवि मांझी (ग्वालियर) और धर्मेंद्र सिंह (सागर) को जेल भेजा है। पुलिस ने बताया कि राजेश ने पूछताछ में बताया कि फैक्टरी के मालिक मैना वाली गली, पुराना हाईकोर्ट, ग्वालियर निवासी पंकज अग्रवाल, नीरज अग्रवाल व बृजेश अग्रवाल हैं। पुलिस ने तीनों मालिकों को भी मुकदमे में आरोपी बनाया है। फैक्टरी मालिक का मध्य प्रदेश में घी का बड़ा कारोबार है।
उन्होंने रियल गोल्ड नाम से देसी घी का पंजीकरण करा रखा है। अपने प्रोडक्ट की आड़ में दूसरी कंपनियों के नाम से नकली घी बाजार में बेच रहे थे। मार्केट में माल कहां-कहां जाएगा यह मालिक ही मैनेजर को बताते थे। डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि फैक्टरी मालिक की तलाश की जा रही है। मैनेजर के व्हाटस एप से कई जानकारी मिली हैं। यह भी पता चला कि नकली घी यूपी के मेरठ, प्रयागराज, बहराइच, गोंडा, वाराणसी, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, सीतापुर, फैजाबाद, गोरखपुर, राजस्थान के उदयपुर, जयपुर, गुवाहाटी, जम्मू कश्मीर, पंजाब के अमृतसर, हरयाणा के सिरसा और बिहार के पूर्णियां में सप्लाई होता था। अब इन जिलों में घी लेकर जाने वालों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
हाल ही में मालामाल हुआ मैनेजर
नकली घी के अवैध कारोबार में गिरफ्तार मैनेजर राजेश भारद्वाज अच्छा मुनाफा कमा रहा था। यही वजह थी कि पुलिस के पकड़ने पर वह खुद को मैनेजर बताने लगा। सख्ती से पूछने पर मुंह खोला था। उसका घर मारुति सिटी कालोनी में है। कोरोना कॉल में उसने कालोनी छोड़ दी थी। इसकी वजह सोसाइटी के हिसाब-किताब में गड़बड़ी रही थी। कुछ माह पहले वह वापस कालोनी में आया। आते ही मकान का नक्शा बदल दिया। लाखों रुपये मकान में लगा दिए। स्कूटर पर चलता था। अब उसके पास गाड़ी भी है। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर उसके पास ऐसा क्या आया। लोगों को जब तक पता चला, तब तक पुलिस ने नकली फैक्टरी चलाने के आरोप में पकड़ लिया।
एक्सपाइरी का माल बनाते थे असली
फैक्टी में पाम आयल से घी बनाया जा रहा है। पुलिस की जांच में सामने आया कि बाजार में जो आयल के डिब्बे एक्सपायर हो जाते हैं, फैक्टरी वाले उन्हें सस्ते में खरीदते थे। इसके बाद नकली घी में मिलाते थे। इससे यह जहां लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा था, वहीं शरीर के लिए हानिकारक था। पैकिंग करते समय नकली घी के साथ ऊपर की तरफ असली घी की लेयर बनाते थे, जिससे लोग पैकेट खोलें तो उन्हें असली जैसे ही लगें।