डॉ. सीमा परोहा ने इंस्टीट्यूट के 20वें निदेशक के रूप में चार्ज संभाला। डॉ. सीमा वर्ष 2014 से संस्थान में बाॅयोकेमिस्ट्री की विभागाध्यक्ष थीं।
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो | नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) के इतिहास में पहली बार किसी महिला को निदेशक पद की जिम्मेदारी दी गई है। प्रो. सीमा परोहा ने बुधवार को 20वीं निदेशक के रूप में कार्यभार संभाल लिया। वर्ष 2014 से वे इंस्टीट्यूट के बाॅयोकेमिस्ट्री विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष थीं। एनएसआई की स्थापना 1936 में हुई थी।
बुधवार को एनएसआई के शर्करा सौंध में स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि एनएसआई के रिसर्च एंड डेवलपमेंट को कॉमर्शियल बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मीठे ज्वार से इथेनॉल बनाने के शोध के संबंध में एक मल्टीनेशनल कंपनी से करार हुआ है। अभी तक शोध कार्य लैब में हो रहा था। अब इसे 10 एकड़ के फार्म पर किया जाएगा। लैब में एक टन मीठे ज्वार से अभी 56 लीटर इथेनॉल बन पाता है। इसके अलावा गन्ना जल को पीने योग्य बनाएंगे। इसे मिनरल वॉटर के रूप में तैयार किया जाएगा।
एनएसआई को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर बॉयोफ्यूल बनाया जाएगा। इसमें आईआईटी के साथ मिलकर काम करेंगे। सेंटर में इथेनॉल, एविएशन फ्यूल, चुकंदर, बाॅयो गैस, सीएनजी आदि पर काम किया जाएगा। प्रोफेसर परोहा ने बताया कि उनकी प्राथमिकता पर कर्मचारियों के प्रमोशन और खाली पदों पर स्टाफ की भर्ती है। फैकल्टी के 27 पद खाली हैं।
संस्थान में ये शोध हुए
– डायटरी फाइबर तकनीक खोजी
– बॉयो सीएनजी की तकनीक तैयार की
– वैकल्पिक फीड स्टाक से इथेनॉल बनाने की तकनीक खोजी
– पोटाश वाली राख से खाद बनाने की तकनीक विकसित की
– प्रेस मड से सीएनजी बनाने की तकनीक खोजी
– विभिन्न तकनीक की खोज के साथ 90 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
– दो तकनीकों के पेटेंट के लिए आवेदन किया जा चुका है।