
इन सावन व्रत नियम का जरूर करें पालन (savan me kya karen)
Savan Somvar Vrat Niyam: धर्म ग्रंथों के अनुसार पृथ्वी पर जन्मे हर मनुष्य को भगवान विष्णु या भगवान शिव में से किसी एक का व्रत जरूर करना चाहिए। इससे उसके सारे कष्ट कटते हैं और मृत्यु के बाद वह जन्म मृत्यु के चक्र से छुटकारा पाता है। इसमें सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इस महीने में उनकी पूजा अर्चना विशेष शुभ फल देती है।
विशेष बात यह है कि सावन सोमवार, त्रयोदशी, शिवरात्रि के व्रत भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न कर देते हैं तो आइये जानते हैं सावन सोमवार व्रत, त्रयोदशी या शिवरात्रि के दिन व्रती को कौन से नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।
- सावन शिवरात्रि या सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन कर भगवान शिव की मूर्ति की पूजा करें। शिवलिंग का जलाभिषेक करें और व्रत रखें। इस पूरे दिन मंत्र जाप और प्रार्थना करें।
- सावन शिवरात्रि या सोमवार के व्रत में फल खा सकते हैं, लेकिन नमक वाली चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए। साथ ही पूरा दिन भगवान शिव का ध्यान करें, मंत्र जपें और उनकी उपासना करें। साथ ही किसी व्यक्ति को अनजाने में भी अपशब्द कहने से बचें।
- व्रत खोलते समय आप कुट्टू के आटे की पूड़ी, फल की चाट, उबले हुए आलू, साबूदाना की खीर और दही आदि खा सकते हैं।
- सावन व्रत के दौरान गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को वस्त्र और भोजन दान करना चाहिए।
सावन में न करें ये काम
- सावन में न कटवाएं बालः सावन मास को उन्नति और प्रगति का प्रतीक माना जाता है। इस समय दक्षिण-पश्चिम मानसून किसानों के लिए खुशियां लाता है। श्रावण भी विकास से जुड़ा है, इसलिए जो भी चीज प्राकृतकि रूप से उगती है, उसे नहीं काटना चाहिए। इसलिए सावन में बाल हों या नाखून काटने से रोका जाता है।
- सावन में न खाएं लहसुन, प्याजः श्रावण मास भगवान शिव की पूजा का महीना है, धार्मिक ग्रंथों में पूजा में सात्विकता पर जोर है और लहसुन प्याज तामसिक खाद्यपदार्थ माना जाता है। कहा जाता है कि इसके सेवन से व्यक्ति में आक्रामकता बढ़ती है। इसलिए व्रत के दौरान इनके सेवन को रोका गया है। साथ ही लहसुन और प्याज परतों वाली सब्जी है और मिट्टी में दबी रहती है। बारिश की वजह से मिट्टी के ऊपर कीचड़ इकट्ठी हो जाती है और प्याज लहसुन में बैक्टीरिया पनपने लगता है। इसी कारण इससे परहेज करने की सलाह दी जाती है।
- सावन में न करें मांस का सेवनः भगवान शिव को पशुपतिनाथ के नाम से भी जाता है। पशुपतिनाथ का अर्थ है सभी जानवरों और जीव-जंतुओं के स्वामी, ऋषियों और तपस्वियों का कहना है कि भगवान शिव की पशुपतिनाथ के रूप में पूजा होती है इसलिए उन प्राणियों और जीवों का सेवन नहीं करना चाहिए, जो उन्हें प्रिय हैं और सावन मास में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
- न करें शराब का सेवनः साथ ही शराब मन को अस्थिर करता है और वो साधना में बाधा डालता है इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए।