
Kerala Banned Oleander Flowers: केरल सरकार (Kerala Government) के दो मंदिरों ने ओलिएंडर फूलों (Oleander Flowers) पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब यह फूल मंदिरों में चढ़ाया नहीं जाएगा और न ही प्रसाद के स्वरूप किसी को दिया जाएगा। केरल में इसे अरली (Arali) के तौर पर जाना जाता है। दरअसल,ओलिएंडर की कुछ पत्तियों को चबाने के चलते 24 वर्षीय नर्स सूर्या सुरेंद्रन की मौत हो गई थी। ओलिएंडर में विषाक्त पाया जाता है।
केरल पुलिस ने बताया है कि सुरेंद्रन को यूके में एक नई नौकरी मिली थी और वो 28 अप्रैल को जाने वाली थी। इससे पहले उसने ओलिएंडर पौधे की कुछ पत्तियां चबा लीं। जो अलप्पुषा के पल्लीपाद में उसके घर के बाहर उगी थी। महिला फोन पर थी तो उसे याद नहीं रहा और फिर उसके मौत हो गई। केरल के फोरेंसिक सर्जन ने भी इसकी पुष्टि की है।
ओलियंडर क्या है?
नेरियम ओलिएंडर उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक पौधा है। इसे सजावटी और भूनिर्माण उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है। इसे केरल में अरली और कनाविरम के नाम से जानते हैं। राजमार्गों और समुद्र तटों के किनारे प्राकृतिक, हरी बाड़ के रूप में उगाया जाता है। आयुर्वेदिक फार्माकोपिया ऑफ इंडिया के मुताबिक ओलियंडर के जड़ की छाल से तैयार तेल का उपयोग त्वचा रोगों के इलाज के लिए किया जाता है।
जिंदगी ले लेता है ये फूल
ओलिएंडर की विषाक्तता को भी दुनिया भर में लंबे समय से मान्यता दी गई है ।शोधकर्ता शैनन डी लैंगफोर्ड और पॉल जे बूर ने लिखा है-पौधे का प्राचीन काल से चिकित्सीय रूप से और आत्महत्या के साधन के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। इसके अलावा, ओलिएंडर को जलाने से निकलने वाले धुएं का अंतर्ग्रहण या सांस लेना भी नशीला हो सकता है। ओलिएंडर विषाक्तता के प्रभावों में मितली, दस्त, उल्टी, चकत्ते, भ्रम, चक्कर आना, अनियमित दिल की धड़कन, धीमी गति से दिल की धड़कन और गंभीर मामलों में मृत्यु शामिल है।