Friday, April 4, 2025
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कानपुर देहात : डीएम साहब, कब बहुरेंगे गौशालाओं के दिन ?

भैसाया गौशाला में मर रहे गौवंश, अफसर बने अनजान, कागजी खानापूर्ति बने डीएम और सीडीओ के निर्देश

कई जगह सूखा भूसा खाकर पल रहे गोवंश।

स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर देहात
चुनावी मुद्दों में भले ही आवारा पशु यानी गोवंशों को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत रूह कपाने वाली है। कानपुर देहात जिला प्रशासन भले ही आवारा गोवंश संरक्षण को लेकर अभियान चलाकर उन्हें संरक्षित करते हुए भरपूर आहार उपलब्ध कराने के लिए निर्देश जारी कर रहा लेकिन रसूलाबाद विकासखंड में तैनात पंचायत सचिव अफसरों के निर्देश को हवा में उड़ा रहे हैं। गौशालाओं में संरक्षित गोवंश को दाना चोकर हरा चारा की बात छोड़ दीजिए। पर्याप्त मात्रा में सूखा भूसा भी नहीं मिल पा रहा है। इससे गौशाला में संरक्षित गोवंश सूखा भूसा खाकर पेट भर रहे हैं। जिम्मेदार कागजों पर गौशालाओं का विधिवत संचालन दिखाकर अफसरों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।
एक तरफ डीएम आलोक सिंह और सीडीओ लक्ष्मी नागप्पन लगातार समीक्षा बैठक कर गौशालाओं की व्यवस्थाएं सुधारने की बातें कर रही हैं। ग्राम पंचायत में तैनात जिम्मेदार सचिव सीडीओ व डीएम के निर्देशों की हवा निकलने से नहीं चूक रहे हैं। रसूलाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत भैंसाया में लगभग 180 गोवंश संरक्षित है। हालत यह हैं कि गांव में बनी गौशालाएं गोवंश के लिए कब्रगाह बनती जा रही है। जिम्मेदारों की लापरवाही से गोवंश को समय पर न भूसा न चारा न हरा चारा दाना चोकर कुछ भी नहीं मिल पा रहा है। इससे गौशाला में संरक्षित गोवंश भूखे पेट मर रहे हैं। सोमवार को रसूलाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत भैसायां संचालित स्थाई गौशाला में एक गौवंश की मौत तड़प तड़प हो गई और एक गौवंश के पीछे के हिस्से से खून भी निकल रहा था। इसी तरह का नजारा देखने को मिला। जहां दोपहर 12-00 बजे तक गौशाला में व्यापक पैमाने पर गंदगी मिली गौशाला में व्यापक पैमाने पर गंदगी पड़ीं है। जगह-जगह गंदगी की ढेर लगे मिले, गौशाला के नाद में गोवंशों का गोबर पड़ा मिला। गौशाला के आसपास चारों तरफ गोवंश कीचड़ और गन्दगी के बीच में रहने को विवश हैं लेकिन जिम्मेदार अनजान है। गोवंश की नाद में सूखा भूसा पड़ा था। जिसका प्रयोग भट्टा में ईंट पकाने के काम में किया जाता है। भूख से तड़प रहे बेजुबान सूखा भूसा को खाकर पेट भर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ऐसे लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। बल्कि उन्हें बचाने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। इससे जिले में संचालित स्थाई गौशालाएं गोवंश के लिए यातनागृह बनकर रह गई है। वही मौके पर पहुंचे ब्लॉक अध्यक्ष किसान यूनियन के रणवीर सिंह ने उपजिलाधिकारी को अवगत भी कराया है। उप जिलाधिकारी से किसान यूनियन के अध्यक्ष ने बताया कि गौशाला में गंदगी का अंबार देखकर किसान यूनियन के अध्यक्ष ने गौशाला में साफ सफाई व्यवस्था खुद की।

हर माह लाखों का बजट कहां जा रहा है

गौशालाओं के संचालन के लिए हर माह करोड़ों रुपयों का बजट खर्च किया जा रहा है। गौशालाओं में संरक्षित पशुओं के लिए चारा पानी और केयरटेकर सहित अन्य इंतजाम किए जाते हैं लेकिन मौके के जो हालात हैं उससे यह पता चल रहा है कि कहीं ना कहीं बड़े पैमाने पर धांधली चल रही है। इसमें जिले के अफसर या तो ध्यान नहीं दे रहे हैं या फिर वह भी सिस्टम में शामिल हैं।

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