
ढाका, एजेंसी। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों और सत्तारूढ़ अवामी लीग के समर्थकों के बीच रविवार को खूनी झड़प में 23 लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हुए हैं। सरकार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी एक ‘असहयोग कार्यक्रम’ में भाग लेने पहुंचे थे। अवामी लीग, छात्र लीग और जुबो लीग के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया और फिर दोनों पक्षों के बीच झड़प हुई। बिगड़ते हालात को देखते हुए हसीना सरकार ने राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू का ऐलान कर दिया है। उधर, भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
ढाका के समाचार पत्र ‘ढाका ट्रिब्यून’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘ प्रदर्शनकारियों और अवामी लीग के समर्थकों के बीच मुंशीगंज में हुई झड़प में 23 लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हुए हैं।’’ खबर में हालांकि, मृतकों की पहचान का खुलासा नहीं किया गया है।

अलर्ट पर रहने की सलाह
बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से चल रही हिंसा में कम से कम 200 लोग मारे जा चुके हैं। ताजा झड़प में 23 लोग मारे गए हैं और दर्जनों घायल हैं। भारत ने बांग्लादेश में रह रहे भारतीयों को अलर्ट पर रहने की सलाह दी है। X पर संदेश में कहा, “हम सिलहट में रहने वाले छात्रों सहित सभी भारतीय नागरिकों से भारतीय उच्चायोग कार्यालय के संपर्क में रहने का अनुरोध करते हैं। साथ ही उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। आपात स्थिति के मामले में, कृपया +88-01313076402 पर संपर्क करें।” समाचार पोर्टल ‘बीडीन्यूज24’ की एक खबर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग की और आरक्षण में सुधार को लेकर हाल में हुए विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के लिए न्याय की मांग करते हुए नारे लगाए। प्रदर्शनकारी असहयोग आंदोलन के पहले दिन राजधानी के साइंस लैब चौराहे पर भी एकत्र हुए और उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाए।
विरोध प्रदर्शन के संयोजकों ने बताया कि ढाका के साइंस लैब, धानमंडी, मोहम्मदपुर, टेक्निकल, मीरपुर-10, रामपुरा, तेजगांव, फार्मगेट, पंथपथ, जतराबाड़ी और उत्तरा में भी प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जाएंगी। समाचारपत्र ‘डेली स्टार’ के अनुसार, रविवार को बंगबंधु शेख मुजीब मेडिकल यूनिवर्सिटी (बीएसएमएमयू) में अज्ञात लोगों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। खबर के अनुसार, लाठी-डंडे लिए लोगों को अस्पताल परिसर में निजी कार, एम्बुलेंस, मोटरसाइकिलों और बसों में तोड़फोड़ करते देखा गया, जिससे मरीजों, तीमारदारों, चिकित्सकों और अन्य कर्मियों में भय पैदा हो गया।