Friday, April 4, 2025
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डीजीक्यूए भर्ती घोटाला : गलत उत्तर मिटाकर किए थे सही, फिर चढ़वाए थे नंबर…हस्ताक्षर के बिना जारी हुआ था रिजल्ट

मार्च 2020 में लॉकडाउन के दौरान ट्विटर के माध्यम से शिकायतकर्ता की बहन ने मामले को उजागर किया। इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो सीबीआई लखनऊ ने सितंबर 2020 में जांच शुरू की थी।

स्वराज इंडिया | कानपुर में डीजीक्यूए में 2016 में हुई भर्ती में हर कदम पर मनमानी की गई थी। पहले तो सगे संबंधियों की उत्तर पुस्तिकाओं में गलत उत्तरों को मिटाकर सही किया और नंबर चढ़वाए गए। इसके अलावा परीक्षा बोर्ड की महिला अफसर के हस्ताक्षर के बिना ही रिजल्ट जारी करवा दिया है। इसमें रक्षा मंत्रालय के अफसरों को भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई थी।

इसके साथ ही शहर से प्रगति रिपोर्ट न तो मुख्यालय भेजने दिया गया और न ही केंद्रीय प्रशासन न्यायाधिकरण कैट को सही तथ्यों की जानकारी दी गई। क्लर्कों की भर्ती परीक्षा के लिए चार सदस्यीय बोर्ड बनाया गया था। बोर्ड में संतोष कुमार तिवारी चेयरमैन थे। इसके अलावा तीन और सदस्य थे। जीटी रोड स्थित रक्षा-प्रतिरक्षा प्रतिष्ठान में कार्यरत महिला अफसर भी इसमें सदस्य बनाई गई थी।

ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रहे, लेकिन मामले में गड़बड़ी को देखते हुए भर्ती परीक्षा के परीक्षा परिणाम रिपोर्ट में हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया था। इसके बाद भी चेयरमैन ने परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। इसमें सगे संबंधी पास हुए थे और नौकरी भी मिल गई थी। बताया गया कि सलाहकार समिति के एक सदस्य ने मंत्रालय में एक उच्च पदाधिकारी के जरिए मामले की जानकारी भी नहीं होने दी।

लॉकडाउन में किया ट्वीट, फिर शुरू हुई सीबीआई जांच
मार्च 2020 में लॉकडाउन के दौरान ट्विटर के माध्यम से शिकायतकर्ता की बहन ने मामले को उजागर किया। इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो सीबीआई लखनऊ ने सितंबर 2020 में जांच शुरू की। 22 दिसंबर 2020 को चयनित अभ्यर्थियों रविकांत पांडेय, उत्कर्ष श्रीवास्तव, प्रतिभा मिश्रा, आरती गुप्ता, अर्पित सिंह एवं भर्ती के पीठासीन अधिकारी रहे डॉ. संतोष कुमार तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पिछले साल 10 फरवरी को सीबीआई कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट पर सवाल खड़े करके फिर से जांच के आदेश दिए थे।

सीबीआई ने भर्ती बोर्ड के चेयरमैन और आरोपियों पर दर्ज कराई थी रिपोर्ट
सीबीआई के अपर पुलिस अधीक्षक राम सिंह ने शिकायत की जांच के बाद 22 दिसंबर 2020 को परीक्षा भर्ती बोर्ड के चेयरमैन डाॅ. संतोष तिवारी के अलावा पांचों आरोपियों और अज्ञात के खिलाफ साजिश रचने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नौ दिसंबर 2021 को सीबीआई एसीबी, लखनऊ ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।

चेयरमैन को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले दी गई थी चार्जशीट
सीबीआई लखनऊ कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए सवाल खड़े किए थे। उच्च अफसर से जांच के निर्देश के बाद रक्षा मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए भर्ती बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी और दो सदस्यों अलीम अंसारी और सुनील कुमार के खिलाफ चार्जशीट दी थी। खास बात यह थी कि चेयरमैन को सेवानिवृत्ति (28 फरवरी 2023) से ठीक एक दिन पहले चार्जशीट दी गई थी।

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