
बेसिक शिक्षा अधिकारी के भ्रष्टाचार के खिलाफ विधायक योगेश चौधरी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
कानपुर देहात के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त जनपद में भी रह चुके हैं चर्चित
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर/लखनऊ। मथुरा का बेसिक शिक्षा विभाग का ऑफिस एक बार फिर सुर्खियों में है। कानपुर देहात के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त जनपद में ताबड़तोड़ भ्रष्टाचार करने के उपरान्त अब मथुरा में भ्रष्टाचार कर रहे हैं। यहां पर भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एंटी करप्शन की टीम ने 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए मथुरा बीएसए कार्यालय के लिपिक ब्रजराज सिंह को गिरफ्तार किया था। यहां भ्रष्टाचार रूकने का नाम नहीं ले रहा है। विधायक विधान परिषद उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय लोक दल योगेश चौधरी द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मथुरा जनपद में किये जा रहे भ्रष्टाचार एवं एन्टी करप्शन टीम द्वारा सुनील दत्त को सहअभियुक्त नामित कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज होने का उल्लेख करते हुए वित्तीय अनियमितता करने हेतु शासन को पत्र भेजा है। इसके पहले सुनील दत्त ने जनपद कानपुर देहात में रहकर अपने आवास पर नियम विरूद्ध तरीके से कैम्प कार्यालय स्थापित कर कार्यालय का संचालन एवं अवैध धन उगाही का कार्य किया था साथ ही सरकारी धन का दुर्पयोग कर अपने व्यक्तिगत कार्यो हेतु एसी, टीवी, इन्वर्टर, बैट्री इत्यादि मे लाखो रूपये खर्च किये थे इसके साथ ही अवैध वाहन, कम्प्यूटर आपरेटर का कोरोना समय का मानदेय नियम विरूद्ध रूप से न देने इत्यादि अनेको प्रकार से दोषी सिद्ध होने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने दिनांक 23 जून 2023 को मय साक्ष्यो सहित जांच आख्या शासन को प्रेषित की थी। जनपद कानपुर देहात से पूर्व रहे जनपद मऊ में 71.20 लाख के गबन मे आरोपित हो या फिर कानपुर नगर में दहेज हत्या में भी सुनील दत्त का नाम हो या फिर एन्टी करप्सन टीम द्वारा रिश्वतखोरी के मामले में एफआईआर हो किन्तु किसी न किसी आका के हाथ होने के कारण ऐसे आपराधिक किस्म के अधिकारी का बचाव बड़ी आसानी से हो रहा है।किसी आका के हाथ होने के कारण सुनील दत्त को मथुरा जिले का बेसिक शिक्षा विभाग का पुनः मुखिया नियुक्त कर दिया गया और इनके द्वारा भ्रष्टाचार को पुनः जारी रखा गया है। जनपद कानपुर देहात में इतने बड़े पैमाने में भ्रष्टाचार करने के उपरान्त एवं जांच कमेटी में तत्कालीन मुख्य कोषाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से आख्या व तत्कालीन जिलाधिकारी नेहा जैन द्वारा सुनवाई के 2 अवसर देते हुए कार्यवाही हेतु शासन को पत्राचार किया गया था लेकिन शासन स्तर से अभी तक उक्त मामले को लम्बित रखा गया और पुनः बेसिक शिक्षा विभाग का पद देने पर अतिरिक्त भ्रष्टाचार किये जाने की जिम्मेदारी दे दी गई। वर्तमान में मथुरा में तैनात बीएसए पर शिक्षकों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा अनेक आरोप लगाए गए हैं।