
–कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी आलोक मिश्रा के चुनाव में कार्यकर्ताओं की कमी
–यूपी में वेंटीलेटर पर कांग्रेस को इस बार भी आक्सीजन मिलना मुश्किल
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
कानपुर।
यूपी में वेंटीलेटर पर सांसे भर रही कांग्रेस को आक्सीजन मिलना फिलहाल मुश्किल लग रहा है। सपा सहित अन्य दलों से गठबंधन करके उतारे गए प्रत्याशी भी कमाल नहीं कर पा रहे हैं। चैथे चरण के तहत 13 मई को करीब एक दर्जन से अधिक सीटों पर वोटिंग होनी है लेकिन चुनाव प्रचार ठंडा पडा हुआ है। कानपुर बुंदेलखंड का अहम प्वाइंट कानपुर में कांग्रेस प्रत्याशी प्रचार प्रसार नहीं कर पा रहे हैं। अब तो लोग कह रहे हैं कि कानपुर में ’हाथ’ को किसी का ’साथ’ नहीं मिल रहा है।
कानपुर गठबंधन प्रत्याशी आलोक मिश्रा डीपीएस स्कूल के संचालक हैं। वह पूरी ताकत के साथ जनसपंर्क में हैं लेकिन जनता से रेसपांस नहीं मिल पा रहा है। हालात यह हैं कि उनको प्रचार के लिए जोशीले कार्यकर्ता और पदाधिकारियों की दरकार है। कांग्रेस के पुराने दिग्गज नदारत हैं। कुछ कांग्रेस के पदाधिकारी लालच वश जुडे हुए हैं। उनको जीत हार से कोई मतलब नहीं है लेकिन रस्म अदायगी तक सीमित हैं।

कानपुर महानगर में 110 वार्ड हैं। इसमें करीब 80 से अधिक कानपुर लोकसभा में आते हैं। बीते नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे खराब रहा था, कई कांग्रेस के दिग्ग्ज पार्षद तक चुनाव हार गए। इसके बाद कांग्रेस की हालत और खस्ताहाल हो चुकी है। रही बची कसर दक्षिण कानपुर के बडे नेता अजय कपूर ने बीजेपी ज्वाइन करके पूरी कर दी। उनके साथ कई वर्तमान और पूर्व पार्षद और कांग्रेस के मजबूत पदाधिकारी व्यक्तिगत संबंधों के चलते बीजेपी में चले गए। राजनीतिक लोग बताते हैं कि कानपुर एक समय कांग्रेस का सबसे बडा गढ था। यह शहर मजदूरों का शहर भी कहा जाता है, यहां की दर्जनों मिलें देश से लेकर विदेश तक मशहूर रहीं। पूर्ववर्ती सरकारों की अनदेखी के कारण मजदूरों और कामगरों का कांग्रेस से मोह भंग होता गया। इसके बाद से लगातार कांग्रेस अपना जनाधार ढूंढ रही लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है।