उत्तर प्रदेश का पहला धनुषाकार ग्लास स्काई वॉक ब्रिज तुलसी जल प्रपात में बनकर तैयार हो गया है। स्काई वाॅक ब्रिज तैयार होने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा है।
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो | भगवान श्रीराम की तपोभूमि में प्रदेश का पहला कांच का धनुषाकार ब्रिज तकरीबन तैयार है। तुलसी जल प्रपात पर बने कांच के इस ब्रिज पर पर्यटकों को हवा में चलने का अहसास तो होगा ही, साथ ही वे झरने की कल-कल की आवाज भी सुन सकेंगे। पौने चार करोड़ की लागत से स्काई वॉक ब्रिज का उद्घाटन लोकसभा चुनाव के बाद होने की उम्मीद है।
कभी डकैतों की चहलकदमी के लिए मशहूर रहे पाठा के जंगल अब पर्यटकों को लुभा रहे हैं। रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के तुलसी (शबरी) जल प्रपात पर कांच का स्काई वाॅक ब्रिज बनाया गया है। यह प्रदेश का पहला ग्लास स्काई वाक ब्रिज है। धनुष-बाण की आकार में बने इस स्काई ब्रिज से पर्यटकों की बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
कुछ ऐसा है स्वरूप
स्काई वाॅक ब्रिज तैयार होने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा है। धनुष और बाण के आकार में बने ब्रिज में खाई (जलप्रपात) की ओर बाण की लंबाई 30 मीटर है। 12 मीटर तक वुडेन टाइल्स, फिर आगे 36 एमएम मोटा टफन ग्लास लगा है। दोनों पिलर के बीच धनुष की चौड़ाई 35 मीटर है। पुल की भार क्षमता प्रति वर्ग मीटर में 500 किलो है। एक बार में 25 यात्री पुल पर आ जा सकेंगे। वन व पर्यटन विभाग ने 3.71 करोड़ रुपये की लागत से ब्रिज का निर्माण कराया है। इस पुल का निर्माण बिहार के राजगीर में स्काई वाक ब्रिज की तर्ज पर किया गया है।
ईको टूरिज्म का बनेगा केंद्र
रानीपुर टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक एनपी सिंह व पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव का कहना है कि यह स्थान ईको टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनेगा। ईको टूरिज्म का मुख्य केंद्र बनाने के लिए यहां रॉक व हर्बल गार्डन के साथ रेस्टोरेंट भी बनाए जाएंगे। ब्रिज का निर्माण वन व पर्यटन विभाग की ओर से कराया गया है। ब्रिज पर टहलने के लिए टिकट लेना होगा। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ब्रिज पर आने और जाने का अलग-अलग मार्ग होगा। ब्रिज के पास जानवरों की आकृति वाली घास का गार्डन, फव्वारा, टॉयलेट आदि का निर्माण किया जा रहा है। सुरक्षा के लिए चेनलिंक वायर भी ब्रिज के पास लगाया जा रहा है।