इंटरनेशनल बॉक्सर विजेंदर सिंह ने कांग्रेस का साथ छोड़ बीजेपी जॉइन कर ली है. अब विजेंदर सिंह के जरिए बीजेपी हरियाणा और पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय को साध सकती है.
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर विजेंदर सिंह कांग्रेस का साथ छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं. विजेंदर सिंह बीजेपी के मुख्यालय पहुंचे और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. इससे पहले चर्चा थी कि कांग्रेस मथुरा से बीजेपी की उम्मीदवार हेमा मालिनी के सामने विजेंदर को चुनावी मैदान में उतार सकती है.
सिंह को कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव में दक्षिणी दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया था. इस चुनाव में उन्हें बीजेपी के रमेश बिधूड़ी के सामने हार का सामना करना पड़ा. जानकारी के लिए बता दें कि विजेंदर सिंह बॉक्सिंग में देश का पहला ओलिंपिक मेडल लाने वाले खिलाड़ी हैं. साल 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में विजेंदर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.
बीजेपी जॉइन करने के बाद विजेंदर सिंह की पहली प्रतिक्रिया
बीजेपी में शामिल होने के बाद विजेंदर सिंह ने कहा, ‘साल 2019 में मैंने कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ा था, लेकिन मैं चाहता हूं कि देश के विकास और तरक्की के लिए काम करूं. लोगों का भला करने के लिए मैं बीजेपी से जुड़ा हूं.’
खिलाड़ियों का भला करने की बात
देश के खिलाड़ी मोदी सरकार से नाराज चल रहे हैं. इसको लेकर जंतर-मंतर पर काफी लंबे समय तक प्रदर्शन चलता रहा. अब एक खिलाड़ी होने के नाते विजेंदर सिंह क्या करेंगे? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह पहले से ही गलत को गलत और सही को सही कहते आए हैं. अब बीजेपी में शामिल होकर वह खिलाड़ियों के भले के लिए काम करना चाहते हैं.
विजेंदर सिंह के जरिए जाट समाज को साधने की तैयारी
बॉक्सर विजेंदर सिंह हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं और जाट समुदाय का बड़ा चेहरा हैं. ऐसे में हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए बीजेपी उनके जरिए जाट समाज को साध सकती है. विजेंदर सिंह हमेशा से राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ मुखरता से बोलते आए हैं. हरियाणा में राज्य सरकार बीजेपी की है और केंद्र में भी बीजेपी सरकार है. हालांकि, अब विजेंदर सिंह खुद बीजेपी में शामिल हो गए हैं.
हरियाणा में उन्हें लेकर हुआ था विवाद
भारत के सबसे सफल बॉक्सरों में शुमार किए विजेंदर ने अपने एमेच्योर कैरियर को तौबा करते हुए प्रोफेशनल बॉक्सर बनने का फैसला किया था। विजेंदर सिंह ने जब बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था तो हुड्डा सरकार ने उन्हें एचपीएस बनाया था। 2015 में पेशेवर मुक्केबाज बनने के दौरान भी उनके डीएसपी पद को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, लेकिन सरकार ने उन्हें डीएसपी स्पोर्ट्स के पद पर बरकरार रखा था।