
मुख्य संवाददाता स्वराज इंडिया
कानपुर। अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा के बाद सबसे अधिक चर्चा कानपुर की सीसामऊ विधानसभा उपचुनावों की है । चुनाव आयोग की घोषणा के बाद मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव टल जाने के चलते अब कानपुर की सीसामऊ सूबे की सबसे हॉट सीट मानी जा रही है । वजह 2012 में हुए परिसीमन के बाद इस सीट का समीकरण इसे सपा का अभेद दुर्ग बनाता है जिसका प्रतिबिंब सपा के हाजी इरफान सोलंकी की जीत की हैट्रिक में नजर आता है । इरफान सोलंकी के सजायाफ्ता होने के कारण हो रहे इस उपचुनाव में भाजपा अपने लिए जीत की राह तलाश रही है ।सबसे अनुभवी भाजपा मंत्री सुरेश खन्ना की प्रभारी मंत्री के रूप में नियुक्ति सपा के अभेद दुर्ग में भगवा परचम लहराने की बीजेपी की उत्कंठा को परिलक्षित करती है लेकिन चुनाव की अधिसूचना जारी होने के कई दिन बाद भी भाजपा प्रत्याशी की घोषणा का ना होना दर्शाता है कि पार्टी अभी उहापोह की स्थिति में है । भाजपा अभी जीत का सही समीकरण बैठा पाने के प्रति आश्वस्त नहीं है । कह सकते हैं बीजेपी मान रही है बड़ी कठिन है डगर पनघट की…
पिछले दस चुनावों के परिणाम
वर्ष 1985 कांग्रेस की कमला दरियावादी ने सीपीएम के कामरेड दौलत राम को 9,702 वोट से हराया।
वर्ष 1989 जनता दल से चुनाव लड़े शिव कुमार बेरिया ने कांग्रेस की कमला दरियावादी को 7,215 वोट से हराया।
वर्ष 1991 भाजपा के राकेश सोनकर ने कांगेस के दीनदयाल को 21,756 वोट
वर्ष 1993 भाजपा के राकेश सोनकर ने सपा के संजय सोनकर को 29,974 वोट से हराया।
वर्ष 1996 भाजपा के राकेश सोनकर ने सीपीएम के कामरेड दौलत राम को 17,100 वोट से हराया।
वर्ष 2002 कांग्रेस के संजीव दरियावादी ने बीजेपी के कपूर चन्द्र सोनकर 5,549 वोट से हराया।
वर्ष 2007 कांग्रेस के संजीव दरियावादी ने बीजेपी के राकेश सोनकर 1,364 वोट से हराया।
वर्ष 2012 सपा के हाजी इरफान सोलंकी ने बीजेपी के हनुमान मिश्रा को 19,663 वोट से हराया।
वर्ष 2017 सपा के हाजी इरफान सोलंकी ने बीजेपी के सुरेश अवस्थी को 5,826 चोट से हराया।
वर्ष 2022 सपा के हाजी इरफान सोलंकी ने बीजेपी के सलिलि विश्नोई को 12,266 वोट से हराया।

पीडीए की काट पीडीए
कहा जाता है उपचुनाव के परिणाम सत्ता पक्ष की ओर झुकाव रखते हैं । लेकिन कुछ सीट ऐसी भी होती हैं जहां के परिणाम प्रचलित धारणाओं के विपरीत होते हैं इसमें आप सीसामऊ सीट को भी शुमार कर सकते हैं राजनीतिक गणित , समीकरण को मापने भांपने वाले तमाम राजनीतिक पंडितों के बताए समीकरण के अनुसार सीसामऊ विधानसभा में मुस्लिम मतदाता 42% के आसपास है जो कि वर्तमान सत्ता के सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत के बाद भी सत्ता पक्ष के विपरीत ध्रुव पर खड़ा है । उस पर सोलंकी परिवार द्वारा गैर मुस्लिम मतदाताओं को तरजीह देने के चलते गैर मुस्लिम वर्ग का एक बड़ा हिस्सा सपा के पक्ष में वोट करता रहा है । वर्ष 2012 से लगातार विधानसभा चुनाव व लोकसभा चुनाव परिणाम में यह स्पष्ट प्रतिबिम्बित होता है । पिछले काफी समय से सपा व कांग्रेस पीडीएफ फार्मूला आधारित राजनीति कर रहे हैं । जिसमें पी का अर्थ पिछड़ा डी का अर्थ दलित और ए का अर्थ अल्पसंख्यक माना जाता है । लेकिन सीसामऊसीट पर तो वर्ष 2012 से ही लगातार पीडीएफ फार्मूला ही चल रहा है ।इस उपचुनाव में भाजपा के नजरिए से देखा जाए तो पिछले तीन चुनाव में दो बार भाजपा ने ब्राह्मण और एक बार वैश्य प्रत्याशी मैदान में उतारा लेकिन तीनों ही बार भाजपा को पराजय मिली । भाजपा को इस सीट पर लगातार तीन जीत राकेश सोनकर ने दिलाई थी लेकिन उसे समय सीसामऊ सुरक्षित सीट हुआ करती थी राजनीतिक पंडितों के अनुमानों को यदि सही माना जाए तो सपा के पक्ष में झुके 42% मुस्लिम मतदाता की काट 28% ब्राह्मण व 18% दलित वोटों से की जा सकती है । लेकिन यह तभी संभव है जब भाजपा यहां पर किसी दलित चेहरे को अपना प्रत्याशी बनाए । लोकसभा चुनाव में पीडीएफ फार्मूले के चलते भी दलित वोट का एक हिस्सा सपा कांग्रेस के पक्ष में चला गया था तो वर्तमान समय में सपा कांग्रेस के पीडीएफ फार्मूले की काट बीजेपी दलित प्रत्याशी को उतार कर सकती है और तब पीडीए का मतलब होगा पिछड़ा +दलित +अगड़ा
आंसुओं की धार कहीं बंद न कर दे भाजपा का विजय द्वार
पूर्व विधायक हाजी इरफान सोलंकी के फेसबुक प्रोफाइल पर एक फोटो है जिसमें इरफान सोलंकी रोटी सकते नजर आ रहे हैं कहा जा सकता है हल्के पुल के माहौल में वह अपनी पत्नी के काम में हाथ बता रहे हैं लेकिन नियति ने स्थिति कुछ ऐसी गलती है कि आज उनकी पत्नी नसीम सोलंकी उनकी लड़ाई उनके राजनीतिक परचम को बचाने की लड़ाई खुद आगे बढ़कर लड़ रही है शिक्षा में उपचुनाव में भाजपा के लिए सबसे बड़ा खतरा सपा प्रत्याशी नसीम सोलंकी के आंसू हो सकते हैं क्योंकि मुस्लिम समाज के इतर भी इरफान सोलंकी का हिंदू वर्ग में समर्थक वर्ग रहा है और यदि इस वर्ग के अंदर सहानुभूति का भाव पैदा हो गया तो फिर भाजपा का शीशा मुंह विजय का स्वप्न साकार हो पाना संभव हो सकता है
