
एफआईपीएल, बीएससीपीएल और सीएंडसी तीन कंपनियां मिलकर लगा रहीं बिहार सरकार को करोड़ों का चूना!
पुनीत मोहन, स्वराज इंडिया।
खगडिय़ा (बिहार)। बरसात में धड़ाधड़ गिरते पुल और बांध के कारण पूरे देश में बिहार की बदनामी हो रही है। पिछले तीन हफ्ते में 13 पुल ढह चुके हैं। बिहार में काम करने के तरीके को लेकर पूरा देश हैरान है। आखिर केवल बिहार से ही ऐसी ख़बरें क्यों आती हैं? पुल की बदहाली के साथ-साथ बिहार में बन रहे बांधों की भी यही हालत हो रही है।
ऐसी ही एक घटना बिहार के खगडिय़ा जिले में बागमती पर बने बांध की भी है। जिसका काम तो दो-तीन साल पहले ही पूरा हो चुका है। स्वराज इंडिया ने जब इसकी पड़ताल की तो ये जानकर हैरानी हुई कि 48 किलोमीटर लंबा ये बागमती बांध और दो अन्य बांध 45 किलोमीटर और 18 किलोमीटर लंबे हैं। इस कार्य को पूरा करने का ठेका वर्ष 2018 में टेंडर के जरिए 650 करोड़ में दिया गया था। इस कार्य को करनेका जिस कंपनी ने इसका ठेका लिया था, उसने लापरवाही की हद कर दी। यहां देखने से साफ समझ में आता है, कि करीब 650 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में बिहार सरकार को तगड़ा चूना लगाने और आसपास रहने वाले ग्रामीणों की आंख में धूल झोंकने का काम बदस्तूर जारी है।
बता दें कि बांध पर आठ से दस फीट से बड़े रेनकट दिखाई देते हैं, जबकि बारिश की अभी शुरुआत ही हुई है। इतने बड़े गड्ढे होने का कारण यह है कि इस बांध के साथ छेड़छाड़ कर बड़ी रकम हजम करने की साजिश चल रही है। दरअसल, इस बांध का काम दो-तीन साल पहले ही पूरा हो चुका था। इस बीच यह बांध दो-तीन बारिश भी झेल चुका है। जिसके कारण बांध काफी मजबूत हो गया था। ग्रामीणों के अनुसार इसके ऊपर उगी जड़ी बूटियां और घने छोटे पेड़ लगे थे, जो इसे बारिश की सीधी मार से होने वाले नुकसान से बचा रहे थे। लेकिन पिछले तीन-चार महीने से कुछ मशीनें लगाकर बांध का बहुत सारा हिस्सा, जो पहले से मजबूत हो चुका था, उसे कमजोर करने का काम किया गया। इस पर लगी जड़ी बूटियां और छोटे पेड़ जो बांध को मजबूत बना रहे थे, उनको उखाडऩे का काम किया गया।

आसपास के जानकार लोगों के समझाने एवं रोकने के बावजूद पेड़ उखाडऩे का काम आज भी दबंगई से चल रहा है। इसके पीछे कारण ये है कि सरकार को दिखाया जा सके कि इस काम को अभी दो-तीन माह के अंदर ही पूरा कराया गया है। इसके जरिए बीएससीपीएल कंपनी मरम्मत का बजट पास करवाकर एक बार फिर बिहार सरकार को चूना लगाना चाहती है। जाहिर है इतना बड़ा घोटाला बिना विभागीय अधिकारियों एवं सरकार की बिना मिलीभगत के नही हो सकता है।
बिहार सरकार से और मोटी रकम निकलवाने के लिए बीएससीपीएल, फ्रन्टलाइन इन्नोवेशन प्राइवेट लिमिटेड (एफआईपीएल) और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ये नया प्लान तैयार किया जा रहा है। जब हमारी टीम ने बांध एरिया का दौरा किया तो अनेक अनियमितताएं सामने आईं।
आपको बता दें कि जिस कंपनी बीएससीपीएल, फ्रन्टलाइन इन्नोवेशन प्राइवेट लिमिटेड (एफआईपीएल) को बिहार सरकार का खगडिय़ा बांध प्रोजेक्ट का काम सौंपा गया था। इसी ग्रुप की एक और कंपनी ‘सी एंड सी’ (चड्डा एंड चड्डा) के विरुद्ध पहले ही धोखाधड़ी का मुकदमा पंजाब में चल रहा है। पंजाब सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद, ‘सी एंड सी’ कंपनी के ही सभी निदेशकगण ने मिलकर सरकार को धोखा देकर काम लेने के लिए एक नई कंपनी (एफआईपीएल) बना डाली और इस नयी कंपनी के नाम पर ठेका लेकर सरकार को खूब ठगा। बात दें कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की इस बात की पूरी जानकारी सरकारी महकमे में पूर्ण रूप से थी। चूंकि वही निदेशक इस कंपनी के लिए भी सरकार से संपर्क कर रहे थे। सी एंड सी के निदेशकों ने बीएससीपीएल को आगे करके काम लिया और फिर पूरा का पूरा कार्य सरकारी नियमों को ताक पर रखकर ख़ुद की नई कंपनी एफआईपीएल के साथ इकरारनामा करा लिया।
साक्ष्यों के आधार पर बता दें कि इन लोगों ने न केवल बिहार सरकार से धोखाधड़ी की बल्कि जिन छोटे 30-35 ठेकेदारों को आगे काम दिया, उनका पैसा भी मार लिया। इसके अलावा मिट्टी की क्वांटिटी के कार्य में भी बड़ी धांधली की गई। दरअसल, इन बड़ी कंपनियों ने सरकार से 650 करोड़ में ठेका हासिल किया और सारा काम छोटे ठेकेदारों को 250 करोड़ पर जारी कर दिया। जिससे स्पष्ट है कि सरकारी एस्टिमेट की तुलना में इन छोटे ठेकेदारों से यह काम केवल 35त्न बजट में पूरा कराया गया। इससे ये भी साफ है कि विभागीय अधिकारियों ने कंपनी के साथ मिलकर एस्टिमेट को ही बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बनाया। इसलिए एस्टिमेट तैयार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए।
बताया जाता है कि जो भुगतान बीएससीपीएल/एफआईपीएल द्वारा सरकार से लिया जा रहा है, उसकी एक बहुत छोटी राशि का भुगतान इन छोटे ठेकेदारों को किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वास्तव में किए गये काम से बहुत अधिक काम मेजरमेंट बुक (एमबी) में चढ़वाने के लिए विभाग के इंजीनियर/पदाधिकारियों को मोटी रक़म देनी पड़ती है। इसके खिलाफ इन ठेकेदारों ने बिहार सरकार से कई बार शिकायत भी की और प्रदर्शन भी किया। इसके कारण काम में भी देरी हुई परंतु बीएससीपीएल और एफआईपीएल कंपनी ने विभाग की खुशामद करके पांच बार एक्सटेंशन प्राप्त किया। अब एक बार फिर मरम्मत और फिनिंशिंग के नाम पर विभागीय अधिकारी और कंपनी के लोग सरकार को लूटने में लग गए हैं।
ऐसा ही एक और मामला सामने आया है जिसकी जांच हमारी टीम कर रही है। जिसमें एक और बीएन सेक्शन बांध जो कि तकरीबन 18 किलोमीटर लंबा है। इस पर जो भी काम हुआ है, वहां पर बहुत पास से मिट्टी और रेत लेकर काम किया जा रहा है। जबकि मेजरमेंट बुक में दिखाया जा रहा है कि इसे बहुत दूर से लाया गया है। इतना ही नहीं जितनी मिट्टी वहां पड़ी है, उससे तीन गुना ज़्यादा एस्टिमेट दिखाया जा रहा है। इस मामले की जांच खनन विभाग से भी कराने की मांग उठ रही है। यदि बीएससीपीएल द्वारा रचे गये इस कारनामे की गहराई से जांच नहीं होगी, तो इसी तरह बिहार में पुल और बांध गिरते रहेंगे और बिहार सरकार पूरे देश में बदनाम तो होती रहेगी साथ ही बाढ़ से बिहार में बदहाल स्थिति पैदा होगी।
बता दें कि सरकार ने बांध की मजबूती और पर्यावरण सुधारने के लिए करोड़ों रुपये लगाकर जो पेड़-पौधे और जड़ी-बूटियां लगवाई हैं, उनको उखाडऩा किसी भी सूरत में जायज नहीं है। बावजूद इसके बिना परमिशन पेड़ों को काटना एक अपराध है। खनन विभाग तथा वन एवं पर्यावरण विभाग से इसकी जांच करायी जानी चाहिए।
आपको बता दें कि बड़ी बात ये है कि इस काम में केन्द्र सरकार का भी योगदान है। ऐसे में इस पूरे घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए, जिससे विभाग में जड़ें जमा चुके घोटालेबाज और विभागीय अफसरों को भी जांच के दायरे में लाया जा सके। क्योंकि, बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला करना मुमकिन नहीं है।