Friday, April 4, 2025
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लेख : खुशियों के रंग बिखेरती है होली डॉ. ज्योति दिलारे  “चिकित्सक एवं लेखक”

“होली एक ऐसा सामाजिक त्यौहार है जो पुरातन काल से हम भारतीयों के बीच हर साल खुशियों का शगुन रंगों के साथ लेकर आता है। होलिका और प्रहलाद की कहानी हो या मेहनकश भारत के लोगों की सामाजिक परम्परा हो, इन दोनों में ही यह त्यौहार हर धर्म, संप्रदाय, जाति के बंधन की सीमा से परे जाकर लोगों को भाई-चारे का संदेश देता है। होली का त्यौहार सामाजिक सौहाद्र का प्रतीक बनकर हर साल हमारे बीच दस्तक देता है।”
हम हर वर्ष होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मानते  हैं। मान्यताएं कुछ भी हों लेकिन सामाजिक एकता और मानवीयता को बनाए रखकर खुशियों को साझा करने की भावना से ओतप्रोत होली का यह त्यौहार निश्चय ही मानवीय मूल्यों को समझने के साथ प्रेम और सद्भावना की मानसिकता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण पर्व है ऐसे त्यौहार जीवन के उत्साह, खुशी, और उमंग को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। 
लोग इस त्योहार में एक साथ मिलते हैं, एक दूसरे को गले मिलते हैं, जो एकता, सद्भाव और खुशी को बढ़ावा देता है। यह समय अपनी सभी चिंताओं को दूर करने और जीवन का पूरा आनंद लेने का दिन बनकर हमारे बीच आता है। इस अद्वितीय त्योहार की महत्वपूर्ण मान्यता रंगों का खेल है, जिसमें लोग एक-दूसरे पर विभिन्न रंगों का चूर्ण फेंकते हैं और खुशियों का इज़हार करते हैं। होली का महत्व न केवल एक त्योहार मात्र है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक विविधता में एकता का प्रतीक भी है और यह दुनिया भर के लोगों के लिए एक रंगीन और आनंददायक त्योहार के रूप में पहचाना जाता है। लेकिन सामाजिक कुरीतियों से यह त्यौहार भी अछूता नहीं है, कुछ सावधानियाँ और जागरूकता से   होली के इस रंगीन त्यौहार में  खुद को  सुरक्षित रखकर त्यौहार का आनंद लें. 

सामाजिक कुरीतियों से बचें 

रंगों के इस त्यौहार में सामाजिक कुरीतियां हमारी सांस्कृतिक विरासत में जहर घोलने का काम करतीं हैं। होली के दिन शराब का सेवन, भांग का भोग नशे को फैलाकर समाज में बुराई को बढावा देता है और सामाजिक सौहार्द्र , एकता और भाईचारे के लिए खतरा बनता है। इसलिए हमें ऐसी कुरीतियों से बचकर भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। तेज आवाज़ के ढोल, डीजे, गन्दगी के फैलाव, से बचना चाहिए यह शांति को भंग करते हैं जो पर्यावरण के साथ प्राणियों के लिए भी ठीक नहीं होता हैं.  

होली के खास पकवान और इससे सतर्कता

होली के खास पकवान और मिठाइयां इस त्योहार का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। गुझिया, मालपुआ, दही-बड़े, और मिठाई जैसे विभिन्न पकवान घरों में बनाये और खाए जाते हैं। इन पकवानों का आनंद लेना होली के त्योहार को और भी मजेदार बनाता है। लेकिन समाज के दुश्मन मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री कर लोगों की जान से खेलते हैं। इसलिए घर के बने खाद्य पदार्थों का सेवन ही करें और बाहर से खरीदी वस्तुओं की जांच पङताल जरूर करें। पानी का सेवन अधिक करें , दही मट्ठा और पकवानों का  रात में सेवन करने से बचें। दिन में खाने के साथ सलाद का सेवन करें। खोये या कहें  डेयरी प्रोडक्ट से बनी  मिठाइयों को एक दिन से ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए। तैलीय खाने से बचें। 

जीवन को बेरंग करते खतरनाक रंगों से बचें

होली के खेल में खतरनाक या हानिकारक रंगों का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे रंगों का उपयोग करने से बचना चहिए। यह त्वचा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए, हमें होली के खेल में सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करना चाहिए। होली के दिन  ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो रंगों को त्वचा तक न पहुंचने दे जैसे कॉटन, लिनन आदि का उपयोग करें। सिर के बालों को सुरक्षित रखने के लिए लिव इन कंडीशनर या  नारियल का तेल लगाकर बालों में रंगों के दुष्प्रभाव से बचाया जा सकता है । आँखों पर सनग्लासेस पहने। खुला रहने वाली त्वचा पर नारियल का तेल लगाकर रखें इससे त्वचा सीधे तौर पर रंग के संपर्क में नहीं आएगी।कोशिश हो की कैमिकलरहित प्राकृतिक रंगों का  प्रयोग करें। बच्चों के लिए कुछ एक्टिव गतिविधियों के साथ गार्डन में सामूहिक खेल रखें यह सुरक्षित और एक अच्छा आउटडोर एक्टिविटी होगा। खेल में जाने से  पहले अच्छा खा

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