Friday, April 4, 2025
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महाराष्ट्र : कॉपरेटिव बैंक केस में अजित पवार और पत्नी को मिली क्लीन चिट

लोकसभा चुनाव से पहले अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को बड़ी राहत मिली है. सुनेत्रा पवार को 25 हजार करोड़ के बैंक घोटाले मामले में मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने क्लीन चिट दे दी है. सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की बारामती सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं.

स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो | ईओडब्ल्यू ने आरोप लगाया था कि पवार दंपत्ति सतारा में जारंदेश्वर शुगर सहकारी कारखाना नाम की चीनी की फैक्ट्री की बिक्री में शामिल थी. ईडी की जांच में दावा किया गया था कि यह फैक्ट्री गुरु कोमॉडिटी सर्विसेज को 2010 में 65 करोड़ की बेची गई थी. इस फैक्ट्री ने कई को-ऑपरेटिव बैंकों से कर्ज लिया हुआ था फिर भी इसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी.

मुंबई पुलिस के इकोनॉमिक ऑफेंसिस विंग (EOW) ने महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार की पत्नी और बारामती लोकसभा सीट से एनडीए की उम्मीदवार सुनेत्रा पवार को 25,000 करोड़ के महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (MSCB) केस में क्लीन चिट दे दी है. मुंबई पुलिस ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि अजीत पवार, सुनेत्रा पवार और उनके भतीजे रोहित पवार से जुड़े मामले में कोई अपराध नहीं हुआ. पुलिस की रिपोर्ट और इसके मतलब पर रोशनी डालने से पहले एक बार समझ लेते हैं कि मामला क्या है.

यह है मामला

ईओडब्ल्यू ने आरोप लगाया था कि पवार दंपत्ति सतारा में जारंदेश्वर शुगर सहकारी कारखाना नाम की चीनी की फैक्ट्री की बिक्री में शामिल थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी (Enforcement Directorate) की जांच में दावा किया गया था कि यह फैक्ट्री गुरु कोमॉडिटी सर्विसेज को 2010 में 65 करोड़ की बेची गई थी. इस फैक्ट्री ने कई को-ऑपरेटिव बैंकों से कर्ज लिया हुआ था फिर भी इसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी.
ईडी का आरोप है कि फैक्ट्री को कर्ज देने वाले बैंकों में पुणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक का नाम भी शामिल है, जो 1995 में अजीत पवार की अध्यक्षता में चल रहा था. जब यह फैक्ट्री किसी लायक न रही तो इसे ‘कौड़ियों के भाव’ पर अजीत पवार के रिश्तेदारों को बेचा गया था.

जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि फैक्ट्री खरीदने के लिए जरांदेश्वर शुगर मिल्स (जेएसएम) प्राइवेट लिमिटेड और जय एग्रोटेक ने खरीदार को पैसे दिए थे. पवार की पत्नी सुनेत्रा 2008 तक जय एग्रोटेक की निदेशक थीं और उनके चाचा राजेंद्र घाडगे जेएसएम के निदेशक थे. यह उस समय ईडी के दावे थे. अब मुंबई पुलिस ने कहा है कि सुनेत्रा जय एग्रोटेक से जुड़ी हुई नहीं थीं. क्योंकि बतौर निदेशक उनका कार्यकाल एक अप्रैल 2004 से शुरू होकर 18 जुलाई 2008 को खत्म हुआ था. चीनी की फैक्ट्री की बिक्री के समय वह इस कंपनी से किसी भी तरह जुड़ी हुई नहीं थीं.

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