Saturday, April 5, 2025
Homeब्रेकिंग न्यूजबच्चों को रील की बजाय रीयल जिंदगी जीने की दें सीख...

बच्चों को रील की बजाय रीयल जिंदगी जीने की दें सीख…

मोबाइल के शॉर्ट बीडियो बच्चों को आकर्षित करते हैं, लेकिन इनका मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता

अंकित यादव/स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो, बाराबंकी/लखनऊ। फोन हाथ में आया नहीं कि छोटे-बड़े रील्स को देखना शुरू कर देते हैं। यह देखना लगातार जारी रहता है। कोई भी एक-दो देखने के बाद नहीं रुक सकता। इन्हें सीख तब आती है जब समय की सुई आगे भागती है। बेहत कायों में लगने वाला समय जाया हो जाता है। दरअसल आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉमों पर रील्स एक प्रमुख ट्रेड बन गया है। ये शॉर्ट बीडियो बच्चों को आकर्षित करते हैं, लेकिन इनका मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अधिकांश रील्स में ऐसा होता है,आदर्शवादी, काल्पनिक या अत्यधिक उत्तेजक होती है, जो बच्चों की मानसिक स्थिति पर आदत डाल सकती है। इसे एकदम से बंद नहीं करें। बेहतर है अपनी देख-रेख में देखने दें। अधिकांश रिल्स में जो जीवनशैली दिखाई जाती है, वह बच्चों को अपनी वास्तविकता से असंतुर कर सकती है। महसूस कर सकते है कि उनके पास जो है वह न तो आकर्षक और न ही महत्वपूर्ण। इसका असर उनकी संवेदनाओं और आत्म-विश्वास पर पड़ता है। जब बच्चे वीडियो रील्स में दूसरों को शानदार जीवन जीते हुए देखते हैं, तो वे अपने जीवन की असंतोषजनक महसूस करने लगते हैं। दरअसल, रील और रियल के बीच का सूक्ष्म भेद नहीं जान पाते हैं। इससे बच्चों व किशोरों की मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है और उनमें चिंता, अवसाद और तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती है।

स्कूल से घर आते ही बच्चे मांगते हैं फोन

स्कूल से घर आते ही बच्चे फोन में रीला देखते हैं। रात में जब सोने जाते हैं. तब फोन को लेकर चिपक जाते हैं। उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं होता। इस आदत में उनका नींद का पैटर्न भी बिगड़ जाता है। नतीजतन बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं और उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर प्रतिकृत असर पड़ सकता है। कहा आपका बच्चा भी दिन-रात फोन में रोल्स देखता है, तो उसे ऐसा नहीं करने दें। लगातार ऐसा करने से दूटि संबंधी समस्याएं उत्पन हो सकती हैं। लगातार मोबाइल या टैबलेट की स्क्रीन पर नजरे रखने से आंखों में थकावट, जलन और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती है।

खेलकूद जैसी एक्टीविटीज में कमी

हर पल रोल्य देखने से बच्चों की शरीरिक गतिविधियां कम हो जाती है। कारण यह कि बच्चा एक जगह बैठकार रिपों फोन में रीत्य ही देखता है। ऐसे में बच्चे खेलों से दूर हो जाते हैं, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास में कमी ला सकता हैं।
रील्स में दिखाए गए हास्य और चुटकुलों की वजह से बच्चों में दूसरों के प्रति सहानुभूति की कमी हो सकती है। वे यह रामशाने में असमर्थ हो सकते है कि मजाक या टिप्पणियों का किसी के मन पर क्या असर हो सकता है।
रील्स में दिखाए गए ट्रेंड्स और लाइफस्टाइल के कारण बच्चों पर एक सामाजिक दबाव महसूस हो सकता है। वे यह महसूस कर सकते हैं कि अगर वे इन ट्रेड्स का पालन नहीं करेंगे तो वे समाज से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर हो सकता है।
रील्स का निरंतर सेवन बच्चों की एकाग्रता की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। छोटे सोटे चीडियो देखने की आदत से उनका ध्यान भड़कता रहता है, जिससे वे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते। बच्चों का अधिक समय रील्स देखने में बर्बाद हो जाता है, जिससे अन्य महत्वपूर्ण और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पाते है, जैसे किताबें पढ़ना, नई चीजें सीखना या खेलों में भाग लेना। यहां तक कि दोस्तों से मिलना-जूला भी कम हो जाता है।

दिखाए गये बांड का पड़ रहा प्रभाव

रील्स में दिखाए गए ब्रांडस और उत्पादों को देखकर बच्चों को लगता है कि खुश रहने के लिए महंगे सामान की आवश्यकता होती है। इससे उनकी वास्तविकता और पैरो के महत्व को समझने में कमी आ सकती है। बच्चे यह सोच सकते हैं कि अगर उनके पास में महंगे उत्पाद नहीं है, तो वे दूमरों से कम लगाव हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

मोबाइल की समय सीमा आप तय करें…

इसका मतलब यह नहीं कि रील्स पूरी तरह से बच्चों के जीवन से हटा दें। उन्हें देखने भी दें और बनाने भी दें। लेकिन इसकी समय सीमा आप करें। बच्चों के देखने की टाइम सीमा तय करें, ताकि वे अधिक समय रील्स देखने में न गंवाएं, जो भी देखें सकारात्मक, प्रेरणादायक, शैक्षिक और सकारात्मक हो। चच्चों को शारीरिक गतिविधियों और आउटडोर खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। इसमें उनका सारीरिक और मानसिक विकास होगा। जरूरी है कि बच्चों के साथ नियमित संवाद करें, ताकि सोशल मीडिया के प्रभावों को समझ सकें और किसी भी नकारात्मक असर के बारे में आपके साथ बात कर सकें।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!